चंडीगढ़ में फिर राजनीतिक भूचाल — एलजी नियुक्ति की तैयारी पर पंजाब–हरियाणा आमने-सामने

केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ में एलजी नियुक्ति की तैयारी की खबर के बाद विवाद बढ़ना तय है। 2016 में पंजाब के विरोध के बाद फैसला वापस लेना पड़ा था। अब फिर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल की दावेदारी से चंडीगढ़ का राजनीतिक टकराव नए मोड़ पर पहुंचने की आशंका है।

चंडीगढ़। चंडीगढ़ में उपराज्यपाल (LG) की नियुक्ति को लेकर फिर विवाद गहराने वाला है। केंद्र सरकार द्वारा प्रशासक के तौर पर लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त करने की तैयारी की खबर सामने आने के साथ ही राजनीतिक माहौल गरमाना शुरू हो गया है।
यह वही मुद्दा है जिसने 2016 में भी बड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोध खड़ा किया था, जिसके चलते केंद्र को निर्णय वापस लेना पड़ा था।

2016 की याद ताज़ा — राजनीतिक दबाव पर वापस लिया गया था निर्णय

अगस्त 2016 में केंद्र सरकार ने पूर्व IAS अधिकारी के. अलफोंस को चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने का फैसला लिया था।
लेकिन उस समय पंजाब में अकाली दल सरकार के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और विपक्ष के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों ने मिलकर इसका विरोध किया था।
राजनीतिक दबाव इतना बड़ा था कि केंद्र सरकार को अलफोंस की नियुक्ति का निर्णय वापस लेना पड़ा

चंडीगढ़ पर दावेदारी — इस बार विरोध और भी बड़ा होने की आशंका

चंडीगढ़ पर—

  • पंजाब दावा करता है कि चंडीगढ़ उसकी ऐतिहासिक राजधानी है
  • हरियाणा इसे साझा राजधानी की अवधारणा के आधार पर अपना अधिकार मानता है
  • अब हिमाचल भी दावेदारी में कूद पड़ा है

ऐसे में एलजी नियुक्ति को चंडीगढ़ की पूर्ण स्वायत्तता की दिशा में कदम माना जा रहा है, जिससे विवाद और तेज हो सकता है।

पंजाब यूनिवर्सिटी विवाद भी जोड़ रहा तनाव

बीते दिनों पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट में सीटें 90 से घटाकर 31 करने के फैसले को उपराष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद शिक्षा मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था।
इसका पंजाब के सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर विरोध किया और अंततः केंद्र को नोटिफिकेशन वापस लेना पड़ा।
पीयू में आज भी लगातार धरने और प्रदर्शन जारी हैं।

26 नवंबर को सीनेट चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन की घोषणा पहले ही हो चुकी है — यानी माहौल पहले से ही संवेदनशील है।

चंडीगढ़ प्रशासन मॉडल में 2022 के बाद बड़ा बदलाव

अप्रैल 2022 में यूटी में सेंट्रल सर्विस रूल्स लागू कर दिए गए, जबकि पहले पंजाब सर्विस रूल्स लागू होते थे।
इसे पंजाब ने भी “चंडीगढ़ से अधिकार छीनने” के रूप में देखा था।

पंजाब यूनिवर्सिटी से भी गहराई से जुड़ा विवाद

2008 में मनमोहन सिंह सरकार के समय पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी हो गई थी —
एनओसी अकाली दल सरकार ने दे दी थी, लेकिन
एक दिन में पंजाब के सभी दलों के विरोध के बाद एनओसी वापस लेनी पड़ी

पीयू की सालाना व्यवस्था के अनुसार—

  • केंद्र 80% बजट देता है
  • पंजाब सरकार 20%
  • लेकिन पंजाब अपने हिस्से का बजट पूरा नहीं देती, जिससे पीयू की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी हुई है।

आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक टकराव संभव

एलजी नियुक्ति का निर्णय —

  • चंडीगढ़ की स्वायत्तता
  • पंजाब यूनिवर्सिटी विवाद
  • पंजाब–हरियाणा–हिमाचल की दावेदारी
  • तीनों को एक साथ जोड़ रहा है।

यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में चंडीगढ़ अगला बड़ा नेशनल विवाद बनने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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