मुस्तफिजुर आईपीएल से बाहर; मौलाना रशीदी ने शाहरुख का किया जिक्र,

नई दिल्ली।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शनिवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज करने के निर्देश जारी किए हैं। इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रतिक्रिया दी है। अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि बीसीसीआई को यह फैसला पहले ही ले लेना चाहिए था, जब (फिल्म अभिनेता और केकेआर टीम के मालिक) शाहरुख खान ने मुस्तफिजुर रहमान को खरीदा था, क्योंकि उस समय भी बांग्लादेश की स्थिति से वह वाकिफ थे।

रशीदी ने कहा, पहले खिलाड़ी को खरीदने की अनुमति देना और बाद में विवाद खड़ा करना..इससे केवल हिंदू-मुस्लिम नफरत फैलती है और शाहरुख खान को गलत तरीके से देशद्रोही के रूप में पेश किया जाता, जबकि उस समय कोई प्रतिबंध नहीं था। यह सब जानबूझकर किया गया।
आध्यात्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, मैं बीसीसीआई का धन्यवाद करता हूं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं और ऐसी स्थिति में उस देश का कोई खिलाड़ी अगर आईपीएल में खेले, तो यह स्वीकार्य नहीं है। मैं इस फैसले के लिए बीसीसीआई का आभार जताता हूं। केकेआर की ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है। यह दुखद है कि केकेआर हिंदुओं के साथ खड़ा नहीं दिख रहा है।
गाजियाबाद के लोनी से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि यह फैसला जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। लोग बीसीसीआई और खेल मंत्रालय के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। यह सब केवल मोदी सरकार की वजह से संभव हुआ है और पिछली सरकारों ने कभी जनता की भावनाओं की परवाह नहीं की।
वहीं, भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा, बांग्लादेश में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां अल्पसंख्यकों पर करीब 3000 हमलों की घटनाएं सामने आई हैं और दीपू दास की भीड़ द्वारा हत्या जैसी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में लोगों की यह चिंता थी कि क्या ऐसे हालात में किसी खिलाड़ी का वहां से आकर भारत में क्रिकेट खेलना और पैसा कमाना सामान्य बात हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में अगर बीसीसीआई ने खिलाड़ी को खेलने की अनुमति नहीं देने का फैसला लिया है, तो यह देश के जनभावनाओं को दर्शाता है और यह पूरी तरह सही फैसला है।
कांग्रेस नेता अतुल लोंढे पाटिल ने कहा, बीसीसीआई पर जय शाह का नियंत्रण है, तो फिर शुरुआत में खिलाड़ी को अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या हो रही थी, तब बोली और नीलामी कैसे हुई। उन्होंने कहा कि सरकार यह कहती है कि चीजें उनके नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन पैसे के लिए पाकिस्तान से क्रिकेट खेलती है। यह मामला कांग्रेस या भाजपा का नहीं, बल्कि देश का है। अगर आप कहते हैं कि आपके पास नियंत्रण नहीं है, तो सत्ता में बने रहने का भी आपको कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस का रुख साफ है- देश पहले।
एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच मैच के दौरान भी आवाज उठाई थी। लेकिन भारत ने सिर्फ पैसों के लिए पाकिस्तान के साथ मैच खेला..अब शाहरुख खान को आगे का फैसला लेना है। मैं बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा करता हूं।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा, फ्रैंचाइजी बीसीसीआई और आईपीसी की ओर से तय नियमों का पालन कर रही थी। उनसे पूछताछ होनी चाहिए। अगर शाहरुख खान राष्ट्र विरोधी हैं, तो बीसीसीआई और आईसीसी भी हैं। गृह मंत्री और उनके बेटे क्या कर रहे हैं? भाजपा राष्ट्रवाद का आह्वान तभी करती है, जब यह उसके लिए फायदेमंद हो। अन्यथा वह भारत के इतिहास में सबसे बड़ी राष्ट्रविरोधी है।

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