लोकसभा में बवाल: तालियों पर नाराज़ हुए स्पीकर ओम बिरला, राहुल गांधी को दी सख्त नसीहत

संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के बयान पर हंगामा हो गया। केसी वेणुगोपाल की तालियों पर स्पीकर ओम बिरला भड़क गए और राहुल गांधी से तीखी बहस हुई।

हाइलाइट्स:

  • स्पीकर ओम बिरला ने केसी वेणुगोपाल के व्यवहार पर जताई कड़ी नाराज़गी
  • राहुल गांधी और स्पीकर के बीच सदन में तीखी बहस
  • पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र बना विवाद की वजह
  • स्पीकर ने कहा – सदन में तालियां बजाना गलत परंपरा
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के दावे को किया खारिज

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा उस वक्त जोरदार हंगामे में बदल गई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का जिक्र किया। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई, वहीं कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के व्यवहार से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भड़क उठे।

सदन में हंगामे के बीच राहुल गांधी के बयान पर केसी वेणुगोपाल खड़े होकर तालियां बजाने लगे और नारेबाजी करने लगे। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा, “ये क्या तरीका है? आप सदन में खड़े होकर तालियां बजा रहे हैं। आप वरिष्ठ नेता हैं, ऐसी परंपरा ठीक नहीं है।”

स्पीकर यहीं नहीं रुके। उन्होंने वेणुगोपाल से तीखे लहजे में पूछा, “आप नेता प्रतिपक्ष के वकील हैं क्या?”

इस पर केसी वेणुगोपाल ने जवाब दिया कि कांग्रेस का हर सदस्य राहुल गांधी का वकील है। इस टिप्पणी पर स्पीकर और सख्त हो गए और बोले, “यहां वकीलों को नहीं, केवल माननीय सदस्यों को बोलने की अनुमति है।”

राहुल गांधी से सीधी बहस

स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को मुद्दे से न भटकने और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ही बोलने की सलाह दी। इस पर राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा, “सर, आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या बोलना है?”

इस पर स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में जवाब दिया, “मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, लेकिन स्पीकर के नाते यह सुनिश्चित करना मेरा दायित्व है कि सदन नियमों और मर्यादा से चले।”

नरवणे की किताब बना विवाद का केंद्र

राहुल गांधी ने दावा किया था कि पूर्व आर्मी चीफ की किताब में चीन द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ की बात कही गई है। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ा जवाब देते हुए कहा, “जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह प्रकाशित ही नहीं हुई है। अगर उसमें तथ्य होते, तो वह जरूर प्रकाशित होती।”

इसके बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार नोकझोंक देखने को मिली।

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