सुग्रीव मित्रता, सीता खोज और शबरी मिलन की लीला का भावपूर्ण मंचन

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क हरदोई : राम लीला कमेटी, हरदोई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वृंदावन से आए कलाकारों ने सुग्रीव मित्रता, सीता खोज और शबरी मिलन की लीला का सुंदर मंचन किया। लीला में दिखाया गया कि भगवान रामचंद्र सीता माता की खोज करते हुए आगे बढ़ते हैं और मार्ग में शबरी से उनका मिलन होता है। इस प्रसंग में राम ने नवधा भक्ति का उपदेश दिया, जिसे दर्शकों ने भावपूर्ण वातावरण में सुना।इसके बाद ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान ने राम की भेंट सुग्रीव से कराई। दोनों के बीच मित्रता स्थापित हुई और मित्रता के आदर्श लक्षणों का वर्णन किया गया। सुग्रीव ने अपने साथ हुए अन्याय का वर्णन किया, जिसे सुनकर राम ने उसे आश्वासन दिया कि वह चिंता न करे।

चौपाई का मंचन विशेष रूप से प्रभावशाली रहा —

“सुन सुग्रीव मैं मारहुँ बाली एक ही बाण।
ब्रह्म रुद्र शरणागत गए न उबरे प्राण॥”

मित्र धर्म निभाते हुए राम ने बाली का वध कर सुग्रीव का संकट दूर किया। इस दृश्य को देखकर उपस्थित भक्तगण भाव-विभोर हो उठे।


14 फरवरी 2026 को लंका दहन

कमेटी की ओर से बताया गया कि 14 फरवरी 2026, शनिवार को दोपहर 2:00 बजे से लंका दहन की लीला का मंचन किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्य आयोजक राम प्रकाश शुक्ला, कृष्ण अवतार दीक्षित, अमलेन्द्र नाथ मिश्रा, संजीव कुमार श्रीवास्तव, उमेश चंद्र मिश्रा, राजेंद्र त्रिवेदी, रजनीश श्रीवास्तव, प्रेम शंकर द्विवेदी, अशोक शुक्ला, विनीत मिश्रा, त्रिलोकी नाथ, प्रमोद मिश्रा, मुनेन्द्र सिंह, समीर शुक्ला सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।


रात्रि लीला: खाटूश्याम चरित्र का मंचन

13 फरवरी 2026 की रात्रि लीला में खाटूश्याम के चरित्र का मंचन किया गया। इसमें कलयुग के प्रमुख देवता खाटू श्याम महाराज की कथा प्रस्तुत की गई।

प्रसंग में बताया गया कि महाभारत काल में भीम के पुत्र घटोत्कच और उनके पुत्र बर्बरीक थे। बर्बरीक को तीन बाणों से संपूर्ण संसार में प्रलय लाने का वरदान प्राप्त था। बाद में भगवान ने उनसे शीश दान मांगा और उसी कारण वे खाटू श्याम नाम से विख्यात हुए। इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को अत्यंत भावुक कर दिया।

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