UP की ‘एपस्टीन फाइल’: बांदा पॉक्सो कोर्ट मृत्यु दंड का ऐतिहासिक फैसला

बांदा पॉक्सो कोर्ट मृत्यु दंड मामले में उत्तर प्रदेश के बांदा जिला अदालत ने बच्चों से दुष्कर्म और डिजिटल शोषण के दोषी दंपती को रेयर ऑफ रेयरेस्ट मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। CBI जांच, 74 गवाहों और डिजिटल सबूतों के आधार पर 160 पन्नों का ऐतिहासिक फैसला।

हाइलाइट्स:

  • बांदा पॉक्सो कोर्ट ने दंपती को सुनाई फांसी की सजा
  • 2010 से 2020 तक मासूम बच्चों का शोषण
  • डार्क वेब पर वीडियो अपलोड कर कमाई
  • CBI ने 74 गवाहों के बयान और डिजिटल सबूत पेश किए
  • कोर्ट ने अपराध को ‘रेयर ऑफ रेयरेस्ट’ माना

लखनऊ/बांदा, 22 फरवरी। अमेरिका में चर्चित Jeffrey Epstein प्रकरण की तरह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सामने आए एक जघन्य मामले में पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो न्यायालय, बांदा ने बच्चों के साथ दुष्कर्म, मानसिक एवं शारीरिक बर्बरता और आपराधिक षड्यंत्र के दोषी पाए गए दंपती को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ श्रेणी में मानते हुए मृत्यु दंड की सजा सुनाई है।

दोषी दंपती—सिंचाई विभाग का निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभजन और उसकी पत्नी दुर्गावती—वर्ष 2010 से 2020 के बीच गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाते रहे। अदालत ने अपने 160 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोरने वाला है और कठोरतम दंड का पात्र है।

लालच, धोखा और हैवानियत

सीबीआई के सहयोगी अधिवक्ता कमल सिंह गौतम के अनुसार दंपती बच्चों को वीडियो गेम, खाने-पीने की चीजों और स्नेह का लालच देकर अपने घर बुलाते थे। वे चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी स्थित किराए के मकान में बच्चों को ले जाकर उनके साथ दुष्कर्म करते और अमानवीय कृत्य करते थे।

जांच में सामने आया कि दंपती ने विशेष रूप से दो कमरे तैयार किए थे, जिनमें हाईटेक कैमरे, वीडियो रिकॉर्डर और लाइटिंग की व्यवस्था थी। इन घिनौने कृत्यों के वीडियो बनाकर उन्हें डार्क वेब पर अपलोड किया जाता था, जिससे आर्थिक लाभ कमाया जाता था।

सीबीआई जांच और डिजिटल साक्ष्य

मामले का खुलासा इंटरपोल से मिले इनपुट के बाद हुआ। Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने 2020 में एफआईआर दर्ज कर 2021 में चार्जशीट दाखिल की।

जांच के दौरान 74 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें 29 बच्चे शामिल थे। छापेमारी में भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए, जिनके आधार पर अदालत ने दोष सिद्ध माना।

जांच में यह भी पाया गया कि लोगों की नजरों से बचने के लिए दंपती ने एक बार मकान भी बदला था और पॉश इलाके में शिफ्ट हो गए थे।

गंभीर मानसिक और शारीरिक आघात

अधिवक्ता के अनुसार 12 बच्चों के गुप्तांगों पर गंभीर चोटें पाई गईं। कई बच्चे मानसिक रूप से आघातग्रस्त हो गए, कुछ ने बोलने और समझने की क्षमता तक खो दी। कुछ पीड़ितों का इलाज एम्स में हुआ, जहां उपचार के बाद कुछ बच्चों की स्थिति में सुधार आया।

विकृत मानसिकता और साइबर अपराध का संगठित रूप

लखनऊ के मनोचिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार कर के अनुसार इस तरह के अपराधों में लिप्त लोग अक्सर विकृत मानसिकता के शिकार होते हैं और बर्बरता में विकृत आनंद खोजने लगते हैं।

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, चाइल्ड यौन शोषण सामग्री पर कड़ी कानूनी रोक के बाद ऐसे नेटवर्क डार्क वेब पर सक्रिय हो गए हैं, जहां यूजर की पहचान गुप्त रहती है और अवैध सामग्री की खरीद-फरोख्त होती है।

अदालत का संदेश

पॉक्सो कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध इस प्रकार के अपराध समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करते हैं। अदालत ने कहा कि यह मामला ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ श्रेणी में आता है, इसलिए दोषियों को फांसी की सजा दी जाती है, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।

यह फैसला न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश माना जा रहा है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी यह मामला डार्क वेब आधारित अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

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