होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का दबदबा: सस्ते ड्रोन और बारूदी सुरंगों से अमेरिका-इजरायल पर भारी

वैश्विक तेल सप्लाई के अहम रास्ते पर नियंत्रण, ईरान की रणनीति से बढ़ा ऊर्जा संकट

होर्मुज स्ट्रेट में ईरान सस्ते ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगों के जरिए अमेरिका-इजरायल पर भारी पड़ रहा है। जानें कैसे 20% वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इस जलमार्ग से दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई गुजरती है, ऐसे में यहां की स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

ड्रोन और सुरंगों से बढ़ी चुनौती
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान पारंपरिक युद्ध के बजाय सस्ते ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगों (माइन) का इस्तेमाल कर रहा है। ये हथियार कम लागत में बड़े नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं, जिससे अमेरिका और इज़राइल की उन्नत सैन्य तकनीक को भी चुनौती मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्ते में इन हथियारों का इस्तेमाल जहाजों की आवाजाही को बेहद खतरनाक बना देता है। इससे बड़े युद्धपोत भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाते।

तेल सप्लाई पर असर, बढ़ी चिंता
होर्मुज में बढ़ते खतरे के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान सुरक्षित रास्ता देने के बदले टैंकरों से भारी रकम वसूल रहा है।

इस स्थिति से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है और ऊर्जा संकट गहराने लगा है। कई देशों में ईंधन की कीमतों पर भी असर देखने को मिल रहा है।

क्यों भारी पड़ रहा ईरान?

  • संकरी समुद्री सीमा का रणनीतिक फायदा
  • कम लागत वाले लेकिन प्रभावी हथियार
  • स्थानीय भौगोलिक पकड़
  • लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों से दबाव

इन्हीं कारणों से, भारी सैन्य ताकत के बावजूद अमेरिका और इजरायल को यहां बढ़त हासिल करने में मुश्किल हो रही है।

भौगोलिक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और हिंद महासागर तक पहुंचने का मुख्य मार्ग है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में यूएई व ओमान स्थित हैं।

होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर जारी संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

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