24 साल बाद बड़ा फैसला: धनंजय सिंह फायरिंग केस में MLA अभय सिंह समेत 6 आरोपी बरी

Dhananjay Singh पर 2002 में हुए हमले के मामले में सबूतों के अभाव में सभी आरोपित दोषमुक्त

“Dhananjay Singh Firing Case Verdict 2026: वाराणसी कोर्ट ने 24 साल पुराने फायरिंग केस में विधायक अभय सिंह और MLC विनीत सिंह समेत 6 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया।”

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के Varanasi में 24 साल पुराने चर्चित फायरिंग केस में बुधवार को बड़ा फैसला आया। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) की अदालत ने जौनपुर के पूर्व सांसद Dhananjay Singh पर हुए जानलेवा हमले के मामले में विधायक Abhay Singh समेत छह आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए Abhay Singh, Vineet Singh (श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह) सहित अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

क्या था पूरा मामला

अभियोजन के अनुसार, 4 अक्टूबर 2002 को Dhananjay Singh अपने साथियों के साथ वाराणसी से जौनपुर लौट रहे थे।

जैसे ही उनकी गाड़ी नदेसर क्षेत्र स्थित टकसाल सिनेमा के पास पहुंची, तभी आरोप है कि Abhay Singh और उनके सहयोगियों ने घात लगाकर हमला किया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

हमले में:

  • Dhananjay Singh घायल हुए
  • उनके गनर वासुदेव पांडेय और ड्राइवर समेत अन्य लोग भी जख्मी हुए
  • मौके पर अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई

पुलिस कार्रवाई और केस की प्रक्रिया

घटना के बाद कैंट थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ 2002 में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब जाकर इस मामले में फैसला आया है, जिसमें अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने के आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

अदालत का रुख

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके चलते आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।

राजनीतिक और कानूनी मायने

यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसमें कई प्रभावशाली नाम जुड़े होने के कारण यह राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।

24 साल बाद आए इस फैसले से एक पुराने हाई-प्रोफाइल केस का पटाक्षेप हो गया है, लेकिन यह भी सवाल खड़ा करता है कि लंबे समय तक चली सुनवाई के बावजूद साक्ष्य क्यों मजबूत नहीं हो पाए।

Varanasi की अदालत के इस फैसले के साथ ही दो दशक से अधिक समय से चल रहा यह मामला खत्म हो गया। अब सभी की नजर इस पर है कि क्या इस फैसले को आगे किसी उच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी या नहीं।

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