“महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन को लेकर सियासत तेज। यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों से विश्वासघात का आरोप लगाया। जानें पूरा बयान और राजनीतिक विश्लेषण।“
लखनऊ/नई दिल्ली । महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने 16 और 17 अप्रैल को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों के विरोध को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपनी महिला-विरोधी मानसिकता उजागर कर दी है।
प्रधानमंत्री का संदेश: महिलाओं की भागीदारी अधिकार, उपकार नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। उन्होंने सभी सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर महिला सशक्तिकरण के पक्ष में निर्णय लेने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैं, बल्कि सक्रिय मतदाता हैं और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं।
अमित शाह का विपक्ष पर पलटवार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और सभी राज्यों में सीटों में संतुलित वृद्धि की जाएगी।
परिसीमन और महिला आरक्षण का संबंध
सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का क्रियान्वयन परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में परिसीमन में देरी का मतलब महिलाओं के आरक्षण में देरी है।
संविधान के अनुच्छेद 81(3) और अनुच्छेद 82 के तहत प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों का पुनः निर्धारण (परिसीमन) आवश्यक है, ताकि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
विपक्ष पर ‘तुष्टिकरण’ और ‘तकनीकी बहाने’ का आरोप
सरकार ने समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे धर्म-आधारित आरक्षण जैसे असंवैधानिक मुद्दे उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं। इसे “तुष्टिकरण” और “तकनीकी बहाना” बताया गया।

महिला सशक्तिकरण के सरकारी दावे
सरकार ने अपने पक्ष में कई योजनाओं और उपलब्धियों का हवाला दिया:
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख से अधिक माताएं लाभान्वित
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से बालिकाओं की शिक्षा और जागरूकता में वृद्धि
- मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 27.37 लाख बेटियां लाभान्वित
- 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया
- पीएम स्वनिधि योजना से 2 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ
- बीसी सखी योजना के तहत हजारों महिलाओं द्वारा वित्तीय लेन-देन
- लखपति महिला योजना के तहत 18.55 लाख महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त
इसके अलावा, महिला सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड और “मिशन शक्ति” अभियान के तहत हजारों मामलों में कार्रवाई और दोषियों को सजा दिलाने का दावा किया गया।
राजनीतिक संदेश और चुनावी संकेत
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह केवल विधेयक का विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों को रोकने का प्रयास है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले चुनावों में महिलाओं का आक्रोश विपक्ष को झेलना पड़ेगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा अब केवल विधायी बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन के तरीकों पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी राजनीति का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
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