“तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने ‘सनातन’ को खत्म करने संबंधी बयान फिर दोहराया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मौजूदगी में दिए गए इस बयान से एक बार फिर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। जानिए पूरा मामला, विधानसभा में क्या कहा गया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।“
चेन्नई। उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में एक बार फिर ‘सनातन धर्म’ को लेकर विवादित बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी। विधानसभा में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि “सनातन, जिसने लोगों को बांटा है, उसे खत्म कर देना चाहिए।” उनके इस बयान के समय मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay भी सदन में मौजूद थे।
उदयनिधि स्टालिन के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी उन्होंने सनातन धर्म को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
सदन में राजनीतिक शिष्टाचार और सहयोग की भी कही बात
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु के विकास के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “कल मुख्यमंत्री को हमारे नेता और कई अन्य नेताओं से शुभकामनाएं मिलीं। यह राजनीतिक शिष्टाचार इस सदन में भी जारी रहना चाहिए। भले ही हम अलग-अलग कतारों में बैठते हों, लेकिन राज्य के विकास के लिए सभी को साथ काम करना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और वह एक ही कॉलेज में पढ़ चुके हैं तथा दोनों अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री को विपक्ष के सुझावों को भी स्वीकार करना चाहिए।
वंदे मातरम् और तमिलनाडु राज्य गीत का भी उठाया मुद्दा
उदयनिधि स्टालिन ने सदन में वंदे मातरम् और तमिलनाडु के राज्य गीत को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने वंदे मातरम् के बाद तमिलनाडु का राज्य गीत बजाए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के शपथ ग्रहण समारोह का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां वंदे मातरम् नहीं बजाया गया था, जबकि तमिलनाडु में यह बजाया गया।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के राज्य गीत को कभी भी दूसरे स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए और सरकार को भविष्य में इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
भाजपा और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया संभव
उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान आगामी दिनों में दक्षिण भारतीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।
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