“लखनऊ नगर निगम शपथ विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज कर दिए हैं। समाजवादी पार्टी के पार्षद को 5 महीने तक शपथ न दिलाने पर कोर्ट ने जिला प्रशासन और नगर आयुक्त को जिम्मेदारी सौंपी।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ नगर निगम में शपथ ग्रहण से जुड़े एक लंबे विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने समाजवादी पार्टी के निर्वाचित पार्षद को पांच महीने तक शपथ न दिलाए जाने के मामले में लखनऊ की भाजपा महापौर सुषमा खर्कवाल के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिए हैं।
यह मामला वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से जुड़ा है, जहां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ललित किशोर तिवारी को अदालत द्वारा निर्वाचित घोषित किए जाने के बावजूद अब तक शपथ नहीं दिलाई गई थी। इसी को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
डबल बेंच, जिसमें जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस कमर हसन रिजवी शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि जब तक निर्वाचित पार्षद को विधिवत शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक महापौर अपने किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक अधिकार का उपयोग नहीं कर सकेंगी। अदालत ने फिलहाल यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर आयुक्त को सौंप दी है।
पूरा मामला 2023 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। उस समय भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला को विजयी घोषित किया गया था, जबकि बाद में सपा प्रत्याशी ललित तिवारी ने चुनाव याचिका दाखिल करते हुए नामांकन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। लंबी सुनवाई के बाद 19 दिसंबर 2025 को सेशन कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी का चुनाव निरस्त करते हुए सपा उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया था।
इसके बावजूद पांच महीने तक शपथ ग्रहण नहीं कराया गया, जिससे मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से कई बार शपथ दिलाने के निर्देश दिए जा चुके थे, लेकिन आदेशों का पालन नहीं हुआ।
अदालत के इस फैसले के बाद नगर निगम प्रशासन में हलचल मच गई है। वहीं विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायपालिका की जीत बताया है। कांग्रेस पार्षद ने भी इसे संविधान के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूरे मामले की निगरानी जिला प्रशासन और नगर आयुक्त के हाथों में आ गई है, और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने तक महापौर के अधिकार स्थगित रहेंगे।
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