“उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारागार विभाग की समीक्षा बैठक में छोटे अपराधियों के लिए ‘ओपन जेल’ व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। यूपी की जेलों में ओवरक्राउडिंग कम करने, हाईटेक सुरक्षा, कौशल विकास, महिला बंदियों और बुजुर्ग कैदियों की सूची तैयार करने पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया। लखनऊ से जेल सुधार और पुनर्वास मॉडल की बड़ी खबर।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जेल व्यवस्था में बड़े सुधार के संकेत देते हुए कहा है कि छोटे अपराधों में बंद कैदियों के लिए ‘ओपन जेल’ व्यवस्था अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधियों और माफिया तत्वों के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधियों को सुधार और पुनर्वास के अवसर मिलने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को कारागार विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान न मानकर सुधार, पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और सुधारात्मक गतिविधियों के जरिए जेलों को नई पहचान दी जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से पीड़ित बंदियों, बच्चों के साथ जेल में रह रही महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने वाले कैदियों की अलग सूची तैयार करने के निर्देश दिए। सरकार इन मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की तैयारी कर रही है।
यूपी जेलों में तेजी से घटी ओवरक्राउडिंग
कारागार विभाग की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश की 70 जेलों की कुल क्षमता 58,400 थी, जबकि बंदियों की संख्या 96,383 तक पहुंच गई थी। उस समय ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी।
वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 हो चुकी है और बंदियों की संख्या 79,782 दर्ज की गई है। इससे ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।
सरकार ने चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार शुरू किए हैं, जिनसे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। वहीं अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में नए जेल निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला जेल निर्माण को प्राथमिकता देने और सभी निर्माण परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
हाईटेक होगी यूपी की जेल सुरक्षा
सीएम योगी ने जेल सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए और कहा कि सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदेश की जेलों में वर्ष 2017 से 2026 के बीच:
- 6200 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
- 30 ड्रोन कैमरे तैनात किए गए
- 24 बैगेज स्कैनर लगाए गए
- 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर स्थापित किए गए
- 195 बॉडी वार्न कैमरे उपलब्ध कराए गए
- 83 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट स्थापित की गईं
सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी निगरानी और मेन वॉल पर वायर फेंसिंग की व्यवस्था की गई है।
बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए ताकि वे समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सकें।
प्रदेश की कई जेलों में सिलाई, दरी, कम्बल, प्रिंटिंग, काष्ठ कला, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, मसाला निर्माण, पॉटरी, कार्पेट और हस्तशिल्प उद्योग संचालित किए जा रहे हैं।
सरकार की ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत प्रदेश की 37 जेलों में उत्पादन इकाइयां चल रही हैं।
जेलों में योग, खेती और गौसंवर्धन को बढ़ावा
सीएम योगी ने बंदियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने जेलों में योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।
प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां 1265 गोवंश संरक्षित हैं। वहीं जेलों की कृषि भूमि 584.51 एकड़ से बढ़कर 624.14 एकड़ तक पहुंच चुकी है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है।
भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी
कारागार विभाग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज की गई है। विभाग में 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।
सरकार के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं और 2868 कर्मचारियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
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