“आगरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक ही मकान पर छह बार अनुदान लेने का मामला उजागर हुआ है। डूडा अधिकारियों, सर्वे एजेंसियों और किराएदारों की मिलीभगत की जांच शुरू हो गई है।“
आगरा। आगरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के अधिकारियों, कर्मचारियों और सर्वे एजेंसियों की मिलीभगत से एक ही मकान को अलग-अलग पते और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कई बार दर्शाकर लाखों रुपये का सरकारी अनुदान हड़प लिया गया।
मामला शहर के ईदगाह क्षेत्र का है, जहां एक मकान पर छह अलग-अलग बार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने का खुलासा हुआ है। प्रत्येक लाभार्थी के नाम पर करीब 2.50 लाख रुपये का अनुदान लिया गया। शिकायत सामने आने के बाद नगर निगम और प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
किराएदारों ने खुद को बताया मकान मालिक
बेलनगंज निवासी पदमचंद ने पार्षद विक्रांत सिंह के साथ नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की। शिकायतकर्ता के अनुसार धनीराम की बगीची स्थित उनके मकान में रहने वाले किराएदारों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को मकान मालिक दर्शाया और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ले लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह खेल एक बार नहीं, बल्कि छह बार किया गया। सभी लाभार्थी एक ही परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। शिकायत के मुताबिक सोमवती पत्नी राजकुमार, संजना देवी पत्नी आजाद कुमार, पूरन देवी पत्नी बहादुर सिंह, गुड्डी देवी पत्नी बच्चू सिंह समेत अन्य नामों पर अनुदान स्वीकृत कराया गया।
फर्जी पते और दस्तावेजों से तैयार हुई फाइलें
शिकायतकर्ता ने बताया कि वास्तविक मकान संख्या 55/215 के स्थान पर काल्पनिक पता “108, धनीराम की बगीची” तैयार किया गया। आरोप है कि सर्वेक्षकों ने मौके का फर्जी सत्यापन भी कर दिया, जिसके आधार पर लाभार्थियों के खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर हो गई।
मामले में यह भी आरोप है कि फर्जी बिजली बिल, जाली नोटरी और कूट रचित दस्तावेजों के जरिए किराएदारों को भूस्वामी दिखाया गया। बिना उचित जांच-पड़ताल के फाइलों को आगे बढ़ा दिया गया और सरकारी अनुदान जारी हो गया।
नगर निगम ने शुरू की जांच
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने मामले की जांच अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार को सौंपी है। प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं।
अपर नगर आयुक्त एवं प्रभारी डूडा शिशिर कुमार ने बताया कि जिन लोगों के दस्तावेज सही नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। साथ ही योजना के तहत ली गई राशि और लोन की रिकवरी भी कराई जाएगी।
पात्र परिवारों को नहीं मिल पा रहा लाभ
यह घोटाला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नए आवेदन लिए जा रहे हैं और हजारों गरीब परिवार आवास पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में फर्जीवाड़े के खुलासे ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ता पदमचंद ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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