“Petrol Diesel Supply News 2026: केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी, अवैध स्टॉकिंग और फ्यूल डायवर्जन रोकने के निर्देश दिए हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।“
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकार ने कहा कि देश के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पेट्रोल और डीजल भंडार मौजूद है। कुछ इलाकों में दिख रही कमी का कारण वास्तविक संकट नहीं, बल्कि जमाखोरी, कालाबाजारी और खुदरा ईंधन की अवैध डायवर्जन है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रतिदिन करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। इसके बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
राज्यों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे पेट्रोल और डीजल की जमाखोरी, अवैध भंडारण और कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष प्रवर्तन दल गठित करें। सरकार ने कहा कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता कम कीमत का फायदा उठाने के लिए थोक आपूर्ति के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में कृत्रिम दबाव बन रहा है।
मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि यह स्थिति वास्तविक कमी नहीं बल्कि “आर्बिट्राज” यानी कीमतों के अंतर का फायदा उठाने की वजह से पैदा हुई है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता मजबूत
सरकार ने कहा कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब है। देश में 22 रिफाइनरियों के जरिए सालाना 258.1 मिलियन टन रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 243.2 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू जरूरत पूरी की, जबकि 61.5 मिलियन टन उत्पादों का निर्यात भी किया गया।
सरकार के अनुसार यह क्षमता भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मामले में मजबूत स्थिति में रखती है। मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों, राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के संपर्क में हैं ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
निजी कंपनियों की बिक्री में गिरावट
मंत्रालय ने बताया कि इस महीने निजी ईंधन कंपनियों की हाई स्पीड डीजल बिक्री में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के माध्यम से औद्योगिक थोक खरीद में लगभग 29 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार का मानना है कि यह मात्रा खुदरा पेट्रोल पंपों की ओर स्थानांतरित हो रही है।
इसी कारण कुछ स्थानों पर पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ा है और ईंधन की उपलब्धता को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है।
उपभोक्ताओं से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है और घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
सरकार ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का अनुशासित संचालन और भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता मिलकर ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था तैयार करते हैं।
पश्चिम एशिया संकट का असर
हालांकि सरकार ने आपूर्ति सामान्य होने का दावा किया है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ईंधन कीमतों पर दिखाई देने लगा है। पिछले एक महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है, जबकि सीएनजी करीब 6 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा लागत बढ़ी है, जिसका कुछ हिस्सा अब भारतीय उपभोक्ताओं पर भी डाला जा रहा है।
फिलहाल सरकार का जोर बाजार में स्थिरता बनाए रखने, जमाखोरी रोकने और आम लोगों तक निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।
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