हीटवेव संकट पर NGT सख्त, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों से मांगा एक्शन प्लान

बढ़ती गर्मी और लू पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने लिया स्वत: संज्ञान, 19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

देश में बढ़ती हीटवेव और भीषण गर्मी पर NGT ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यूपी, बिहार, राजस्थान समेत कई राज्यों को एक्शन प्लान और जलवायु अनुकूलन रणनीति पेश करने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली। देशभर में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव के संकट को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस मामले में स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए केंद्र और कई राज्यों को विस्तृत एक्शन प्लान पेश करने का निर्देश दिया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रिंसिपल बेंच ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह मामला दर्ज किया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लगातार बढ़ता तापमान लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल रहा है।

मामले की सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने माना कि भीषण गर्मी का असर अब केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती-किसानी, जल संकट, वन्यजीव, श्रमिकों की कार्यक्षमता और देश की अर्थव्यवस्था तक को प्रभावित कर रहा है।

Amritsar: A man washes his face to escape the scorching heat during a hot summer day in Amritsar on Tuesday, May 26, 2026. (Photo: IANS)

एनजीटी ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दिल्ली सहित कई राज्य लगातार लू की चपेट में हैं। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की कि हीटवेव देश की सबसे कम पहचानी जाने वाली पर्यावरणीय आपदाओं में से एक बन चुकी है।

पीठ ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट की इमारतों, घटती हरियाली, वाहनों के धुएं, औद्योगिक गतिविधियों और अत्यधिक ऊर्जा खपत के कारण गर्मी का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। वहीं ग्रामीण इलाकों में लोगों को लंबे समय तक धूप में काम करना पड़ता है और वहां पर्याप्त कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तथा संस्थागत सहायता का अभाव है।

एनजीटी ने केंद्र और राज्यों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए क्षेत्रवार जलवायु अनुकूलन रणनीति तैयार करने, हाई-रिजॉल्यूशन थर्मल मैपिंग, रिमोट सेंसिंग तकनीक, सटीक मौसम पूर्वानुमान और आम जनता के लिए सुलभ जलवायु डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

New Delhi: Commuters use scarves to shield themselves from the scorching sun as the temperature rises during the summer season in New Delhi on Monday, May 18, 2026. (Photo: IANS/Wasim Sarvar)

इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने स्कूलों और समुदाय स्तर पर मौसम निगरानी व्यवस्था विकसित करने तथा हीटवेव के प्रभावों पर व्यापक शोध की आवश्यकता भी बताई। एनजीटी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ता तापमान पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय है।

मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय समेत कई केंद्रीय मंत्रालयों को पक्षकार बनाया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और दिल्ली सरकारों से भी जवाब और कार्ययोजना मांगी गई है।

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्ष अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत एक्शन प्लान दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी हीटवेव को लेकर चिंता जता चुका है। आयोग ने पिछले महीने 21 राज्यों और दिल्ली को निर्देश जारी कर कमजोर वर्गों की सुरक्षा और राहत उपाय सुनिश्चित करने को कहा था।

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