योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: यूपी में ग्रामीण स्वच्छता पर हर साल खर्च होंगे 750 करोड़ रुपये

योगी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ‘संचालन एवं अनुरक्षण नीति-2026’ को मंजूरी दी है। नई नीति के तहत उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्वच्छता परिसंपत्तियों के रखरखाव पर हर साल करीब 750 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत तैयार ‘संचालन एवं अनुरक्षण नीति-2026’ को मंजूरी दे दी गई। नई नीति के लागू होने के बाद प्रदेश की ग्रामीण स्वच्छता परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव पर हर वर्ष लगभग 750 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

यह पहली बार है जब ग्रामीण स्वच्छता से जुड़ी परिसंपत्तियों के संचालन और अनुरक्षण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इससे गांवों में बनाई गई स्वच्छता सुविधाओं को लंबे समय तक उपयोगी और क्रियाशील बनाए रखने में मदद मिलेगी।

15.50 लाख परिसंपत्तियों का होगा नियमित रखरखाव

नई नीति के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित करीब 15.50 लाख स्वच्छता परिसंपत्तियों का नियमित संचालन और अनुरक्षण किया जाएगा। इनमें नालियां, सेप्टिक टैंक, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां, गोवर्धन प्लांट और अन्य स्वच्छता ढांचे शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य इन परिसंपत्तियों को केवल निर्माण तक सीमित न रखकर उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

ओडीएफ और ओडीएफ प्लस की स्थिति होगी मजबूत

सरकार के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाए रखने के साथ-साथ ODF प्लस की अवधारणा को मजबूत करना है। इसके तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे गांवों में पर्यावरणीय स्वच्छता को स्थायी रूप से बनाए रखा जा सके।

नई नीति के माध्यम से पहले से निर्मित स्वच्छता परिसंपत्तियों को नियमित रूप से संचालित रखा जाएगा, ताकि वे लंबे समय तक जनोपयोगी बनी रहें।

पंचायतों को मिलेंगे आय के नए स्रोत

पंचायती राज विभाग इस नीति के तहत ग्रामीण निकायों को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाने की दिशा में काम करेगा। इसके लिए डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण, अनुपयोगी प्लास्टिक की बिक्री तथा अन्य स्थानीय संसाधनों के माध्यम से आय के स्रोत विकसित किए जाएंगे। इससे स्वच्छता व्यवस्था के संचालन में वित्तीय स्थिरता भी आएगी।

केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार हुई नीति

‘संचालन एवं अनुरक्षण नीति-2026’ का मसौदा भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। राज्य सरकार ने इसमें आवश्यक संशोधन करते हुए उत्तर प्रदेश की परिस्थितियों के अनुसार अंतिम रूप दिया है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता प्रबंधन अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और टिकाऊ बनेगा।

क्या होंगे नई नीति के प्रमुख लाभ?

  • ग्रामीण स्वच्छता परिसंपत्तियों का नियमित संचालन और रखरखाव सुनिश्चित होगा।
  • हर वर्ष लगभग 750 करोड़ रुपये अनुरक्षण कार्यों पर खर्च किए जाएंगे।
  • प्रदेश की 15.50 लाख स्वच्छता परिसंपत्तियां लंबे समय तक क्रियाशील रहेंगी।
  • गांवों में ODF और ODF प्लस की स्थिति को मजबूती मिलेगी।
  • डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण और प्लास्टिक प्रबंधन से पंचायतों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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