लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: SIT जांच में IAS अभिषेक प्रकाश और प्रभुनाथ सिंह के नाम, LDA ने भेजी अधिकारियों की सूची

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड मामले में SIT जांच तेज हो गई है। LDA ने पूर्व उपाध्यक्ष IAS अभिषेक प्रकाश और प्रभुनाथ सिंह समेत 100 से ज्यादा अधिकारियों की सूची भेजी है।

लखनऊ: अलीगंज सेक्टर-डी में अवैध बिल्डिंग में हुए भीषण अग्निकांड मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अब अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने पूर्व उपाध्यक्ष रहे दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के नाम भी SIT को भेजे हैं।

LDA की ओर से भेजी गई सूची में परिवहन निगम के मौजूदा प्रबंध निदेशक प्रभुनाथ सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग में सचिव पद पर तैनात IAS अभिषेक प्रकाश के नाम शामिल हैं। दोनों अधिकारी पहले LDA उपाध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं।

2016 से 2024 तक तैनात अधिकारियों की सूची भेजी गई

अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए SIT लगातार संबंधित विभागों से जानकारी जुटा रही है। इसी क्रम में LDA ने वर्ष 2016 से 2024 तक प्राधिकरण में तैनात रहे अधिकारियों की विस्तृत सूची जांच टीम को उपलब्ध कराई है।

SIT अब इन अधिकारियों की तैनाती अवधि, उनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों, नक्शा पास करने की प्रक्रिया और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा करेगी।

100 से ज्यादा अधिकारियों के नाम जांच के दायरे में

LDA अब तक SIT को 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम भेज चुका है। इसमें उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव, जोनल अधिकारी और प्राधिकरण सेवा के कई अधिकारी शामिल हैं।

SIT टीम में अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं, जो अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।

अग्निशमन और बिजली विभाग से भी मांगी गई सूची

सूत्रों के मुताबिक SIT ने अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग से भी संबंधित अधिकारियों की सूची मांगी है। पहली बार इस मामले में IAS और PCS अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध निर्माण को रोकने, निरीक्षण करने और कार्रवाई करने में किन अधिकारियों की लापरवाही रही।

अधिकारियों में बढ़ी हलचल

SIT जांच में वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि केवल तैनाती के आधार पर किसी अधिकारी का नाम जांच में शामिल करना उचित नहीं है, जबकि जांच टीम जिम्मेदारी तय करने के लिए सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

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