दुग्ध शक्ति से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक संबल, 3.25 लाख महिला दुग्ध उत्पादक बनीं ताकत; जानिए पांच कंपनियों का पूरा मॉडल

उत्तर प्रदेश में महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं। पांच कंपनियों से 3.25 लाख महिलाएं जुड़ी हैं और रोज 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है।

लखनऊ, 17 अगस्त। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महिला नेतृत्व वाली दुग्ध उत्पादक कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित इन कंपनियों से करीब 3.25 लाख महिला दुग्ध उत्पादक जुड़ी हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल और मार्गदर्शन में संचालित इस व्यवस्था का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित करना है। दुग्ध उत्पादन से लेकर संग्रहण और प्रसंस्करण तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही है।

पांच कंपनियों से जुड़ीं लाखों महिला किसान

प्रदेश में पांच महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां ग्रामीण दुग्ध अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। इनमें बलिनी, काशी, सामर्थ्य, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी शामिल हैं।

बलिनी से 98 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ीं

बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी बुंदेलखंड के सात जनपदों के 1,217 गांवों में काम कर रही है। कंपनी से 98,010 महिला किसान जुड़ी हैं। यहां प्रतिदिन करीब 3.20 लाख लीटर दूध खरीदा जाता है। कंपनी से जुड़ी करीब 49,571 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

काशी कंपनी से 49 हजार महिला किसान जुड़ीं

काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी पूर्वांचल के सात जनपदों के 1,014 गांवों में संचालित है। इससे 49,317 महिला किसान जुड़ी हैं और प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर दूध खरीदा जाता है। कंपनी से जुड़ी लगभग 11,715 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

सामर्थ्य कंपनी में सबसे अधिक महिला किसान

सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी मध्य क्षेत्र के सात जनपदों के 1,555 गांवों में कार्यरत है। इससे 1,12,508 महिला किसान जुड़ी हैं। कंपनी रोजाना करीब 3.75 लाख लीटर दूध खरीदती है। इसके साथ जुड़ी करीब 32,848 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

गोरखपुर क्षेत्र में 66 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ीं

श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी गोरखपुर क्षेत्र के चार जनपदों के 1,087 गांवों में काम कर रही है। इससे 66,057 महिला किसान जुड़ी हैं और प्रतिदिन करीब 1.55 लाख लीटर दूध खरीदा जाता है। कंपनी से जुड़ी 10,546 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

तराई क्षेत्र में सृजनी कंपनी का विस्तार

सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी तराई क्षेत्र के छह जनपदों के 1,685 गांवों में संचालित है। इससे 60,122 महिला किसान जुड़ी हैं। कंपनी प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर दूध खरीद रही है। इसके साथ जुड़ी करीब 7,932 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

सीधे बैंक खाते में पहुंचता है दूध का भुगतान

महिला दुग्ध उत्पादकों को दूध की गुणवत्ता के आधार पर फैट और एसएनएफ के अनुसार पारदर्शी मूल्य दिया जाता है। दूध की कीमत सीधे संबंधित महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाती है।

भुगतान के लिए प्रत्येक महीने की 3, 13 और 23 तारीख निर्धारित की गई है। इससे महिला दुग्ध उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलने के साथ नियमित और सुनिश्चित आय का आधार भी मिल रहा है।

दूध से लेकर घी-पनीर तक महिलाओं की भागीदारी

इस मॉडल में महिलाओं की भूमिका केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है। बलिनी और सामर्थ्य कंपनियां दूध की खरीद के साथ घी और पनीर जैसे उत्पादों का प्रसंस्करण भी कर रही हैं।

वहीं काशी, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा और सृजनी कंपनियां दूध का संग्रहण कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मदर डेयरी को उपलब्ध करा रही हैं। इससे महिलाओं की भागीदारी दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीण डेयरी मूल्य श्रृंखला में भी बढ़ रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला यह दुग्ध मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को नियमित आय का माध्यम उपलब्ध कराने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह मॉडल उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में भी योगदान देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button