“NCB चीफ अनुराग गर्ग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए तीन साल का रोडमैप तैयार करने को कहा। नेटवर्क, फाइनेंसर और किंगपिन पर कार्रवाई पर जोर दिया गया।“
नई दिल्ली। देश में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अगले तीन वर्षों के लिए अपना अलग एंटी-ड्रग्स रोडमैप तैयार करने को कहा है। NCB महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि राज्यों की रणनीति उनके स्थानीय स्तर की तस्करी संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप होनी चाहिए।
नई दिल्ली में आयोजित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में NCB प्रमुख ने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के तरीके में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।
जब्ती से नेटवर्क तक कार्रवाई का फोकस
अनुराग गर्ग ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को केवल बरामद किए गए मादक पदार्थों की मात्रा से नहीं आंका जाना चाहिए। अब एजेंसियों को उन ट्रांसनेशनल, इंटर-स्टेट और इंट्रा-स्टेट नेटवर्क की पहचान करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा, जो ड्रग्स की सप्लाई और तस्करी के पीछे काम कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, कार्रवाई का लक्ष्य केवल ड्रग्स पकड़ना नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की पहचान, उसके संचालकों का पता लगाना और नेटवर्क को खत्म करना होना चाहिए।
इस बदलाव के तहत तस्करी नेटवर्क के ऑर्गनाइजर, किंगपिन और फाइनेंसर तक पहुंचने और उनके खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
राज्यों को बनाना होगा तीन साल का रोडमैप
NCB प्रमुख ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों से तीन साल का रोडमैप तैयार करने को कहा। यह रोडमैप National Vision Document on Narcotics Control 2026-29 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप होगा।
हालांकि, हर राज्य की रणनीति वहां मौजूद ड्रग तस्करी के स्वरूप और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। यानी सीमावर्ती राज्यों, बड़े शहरों, समुद्री मार्गों, अंतरराज्यीय परिवहन नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर सक्रिय तस्करी चैनलों की चुनौतियों के अनुसार रणनीति अलग हो सकती है।
इंटेलिजेंस शेयरिंग पर भी जोर
ड्रग्स नेटवर्क को तोड़ने के लिए अलग-अलग कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
NCB के अनुसार, अलग-अलग जगहों पर होने वाली ड्रग्स बरामदगी कई बार एक बड़े नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच समय पर जानकारी साझा होने से नेटवर्क के आयोजकों और वित्तीय मददगारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
वित्तीय प्रोफाइलिंग और किंगपिन पर फोकस
दो दिवसीय सम्मेलन में राज्य एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करने के साथ ड्रग नेटवर्क की Financial Profiling पर भी चर्चा हुई।
इसके अलावा PITNDPS Act के प्रभावी इस्तेमाल और संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क तथा किंगपिन के खिलाफ मुकदमे को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया।
नार्को समन्वय केंद्र और Joint Coordination Committee की बैठकों को ज्यादा परिणाम केंद्रित बनाने की जरूरत भी सामने रखी गई।
2029 तक ड्रग्स कारोबार खत्म करने का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को सम्मेलन का उद्घाटन किया था। उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स के कारोबार को खत्म करने का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा।
सरकार ने इस लक्ष्य को देश के विकास और आने वाली पीढ़ियों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव से बचाने से जोड़ा है।
नशा मुक्ति के साथ डिमांड रिडक्शन पर भी जोर
सम्मेलन में केवल प्रवर्तन कार्रवाई ही नहीं बल्कि Demand Reduction, Prevention और Rehabilitation पर भी चर्चा हुई।
इसके तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नशा मुक्त कैंपस फ्रेमवर्क, शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री जोन बनाने और नशा मुक्त भारत अभियान को और विस्तार देने जैसे मुद्दे शामिल रहे।
इसका उद्देश्य ड्रग्स की सप्लाई रोकने के साथ-साथ नशीले पदार्थों की मांग को कम करना और प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर काम करना है।
डार्कनेट और क्रिप्टो से जुड़ी तस्करी नई चुनौती
सम्मेलन में ड्रग्स अपराध के बदलते तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसमें सिंथेटिक ड्रग्स, प्रीकर्सर केमिकल, अवैध या गुप्त प्रयोगशालाएं, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी आधारित नशीले पदार्थों के अपराध शामिल रहे।
तकनीक आधारित अपराधों से निपटने के लिए विभिन्न डेटाबेस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई। इनमें निदान, ई-साक्ष्य, ई-जेल और CCTNS जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई के लिए NAR-K9 और सूचना साझा करने के लिए MAC प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
रेलवे के जरिए तस्करी रोकने पर NCB-RPF की साझेदारी
NCB प्रमुख ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने रेलवे नेटवर्क के जरिए नशीली दवाओं की तस्करी से निपटने के लिए नारकोटिक्स सेल का गठन किया है।
उन्होंने कहा कि NCB और RPF के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन से दोनों एजेंसियों के बीच क्षमता निर्माण, सूचना साझा करने और संयुक्त अभियानों को संस्थागत रूप देने में मदद मिलेगी।
36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी
दो दिवसीय सम्मेलन में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रमुखों तथा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन की थीम “United Resolve, Shared Responsibility” रखी गई थी। इसका मूल जोर ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा साझा रणनीति तैयार करने पर रहा।
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