सुशांत यूनिवर्सिटी में शहरी नियोजन पर विशेषज्ञ संवाद, विकास और पर्यावरण के संतुलन पर दिया जोर

“सुशांत यूनिवर्सिटी में 13 अक्टूबर 2026 को शहरी नियोजन पर विशेषज्ञ संवाद हुआ। गुरुग्राम में नियामकीय अनुपालन, सार्वजनिक भूमि, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर चर्चा की गई।“

गुरुग्राम। भारत के तेजी से विकसित होते शहरों में सुनियोजित विकास, नियमों के प्रभावी पालन और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा के लिए सुशांत यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर के अर्बन प्लानिंग विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को विशेषज्ञ संवाद का आयोजन किया। “फ्रॉम प्लान टू ग्राउंड रियलिटी: प्लानिंग, रेगुलेशन एंड एनफोर्समेंट इन अर्बन इंडिया” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में शहरी विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने योजनाओं को जमीन पर लागू करने, सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा और शहरों में हरित क्षेत्रों को संरक्षित रखने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम में गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर एवं नोडल अधिकारी (एनफोर्समेंट) टी. प्र. आर. एस. बठ्ठ और भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ऑर्गनाइजेशन (TCPO) की रीजनल एंड एनवायरनमेंटल प्लानिंग डिवीजन के प्रमुख डॉ. संदीप राउत ने भाग लिया।

विशेषज्ञों का सम्मान कर किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत आमंत्रित विशेषज्ञों के सम्मान के साथ हुई। सुशांत यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राकेश रंजन, रजिस्ट्रार डॉ. संजीव शर्मा और स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर के डीन डॉ. नवीन पिपलानी ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ शहरी नियोजन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा जरूरी

टी. प्र. आर. एस. बठ्ठ ने गुरुग्राम में शहरी नियोजन संबंधी नियमों को जमीन पर लागू करने के दौरान आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शहरों के व्यवस्थित विकास के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और नियामकीय प्रावधानों का पालन भी आवश्यक है।

चर्चा के दौरान अतिक्रमण की समस्या, सार्वजनिक भूमि को सुरक्षित रखने और जनहित में उस पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करने जैसे विषयों पर जोर दिया गया। उन्होंने शहरी विकास के प्रबंधन में संबंधित विभागों के बीच समन्वय और नियमों के अनुपालन को महत्वपूर्ण बताया।

हरित क्षेत्रों और पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण जरूरी

डॉ. संदीप राउत ने सतत शहरी विकास की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि शहरों के विस्तार के साथ हरित क्षेत्रों, खुले स्थानों और पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण भी प्राथमिकता होनी चाहिए। शहरी नियोजन में विकास की जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है।

उन्होंने व्यापक नियोजन दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया, जिससे शहरों का विकास व्यवस्थित तरीके से हो और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहे। तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को नियोजन प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता भी चर्चा का प्रमुख विषय रही।

विद्यार्थियों को मिले करियर और व्यावसायिक जिम्मेदारियों के बारे में सुझाव

विशेषज्ञ संवाद विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी रहा। उन्हें टाउन प्लानिंग और कंट्री प्लानिंग के क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं, पेशेवर जिम्मेदारियों तथा नीति निर्माण से लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन तक की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।

विद्यार्थियों ने शहरी विकास के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर व्यावहारिक चुनौतियों और पेशेवर अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस तरह कार्यक्रम ने कक्षा में मिलने वाली सैद्धांतिक शिक्षा और वास्तविक कार्यक्षेत्र के अनुभवों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा शहरी विकास

कार्यक्रम के समापन पर विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के संदर्भ में शहरी विकास पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में प्रभावी शहरी प्रशासन, एकीकृत नियोजन और सतत विकास को भविष्य के शहरों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

प्लानिंग विभाग के प्रमुख डॉ. हिमाद्रि शेखर डे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेतृत्व, आमंत्रित विशेषज्ञों और कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सुशांत यूनिवर्सिटी की इस पहल ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग, अनुभव आधारित शिक्षा तथा भविष्य के शहरी नियोजकों को व्यावहारिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

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