यूपी में 13 लाख फर्जी वोट जुड़ने का संजय सिंह का आरोप, 85 हजार नाम बिना कारण काटने का दावा

“यूपी में मतदाता सूची पर AAP सांसद संजय सिंह ने 13 लाख संदिग्ध नाम जुड़ने और 85 हजार नाम बिना कारण काटने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग से बूथवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।“

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में करीब 13 लाख संदिग्ध मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, जबकि लगभग 85 हजार मतदाताओं के नाम बिना कारण बताए काट दिए गए। शुक्रवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग से इन मामलों पर जवाब मांगा।

संजय सिंह ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग से नए जोड़े गए और हटाए गए नामों की विधानसभा तथा बूथवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

13 लाख नामों का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

संजय सिंह के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले उत्तर प्रदेश में करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। उन्होंने पुनरीक्षण के दौरान लगभग 2.90 करोड़ नाम हटाए जाने और बाद में नाम जोड़ने के लिए करीब 84 लाख आवेदन आने का उल्लेख किया।

AAP सांसद ने दावा किया कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों में लगभग 71 लाख 13 हजार नाम जोड़े जाने का विवरण सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बाकी करीब 13 लाख नाम कहां जोड़े गए और उनसे संबंधित जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इन नामों को जोड़ने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने चुनाव आयोग से संबंधित मतदाताओं की सूची, उनके विधानसभा क्षेत्र और बूथ की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि राजनीतिक दल आंकड़ों का सत्यापन कर सकें।

85 हजार नाम बिना कारण काटने का आरोप

संजय सिंह ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत करीब 4.30 लाख आवेदन आए थे। इनमें से लगभग 85 हजार मतदाताओं के नाम बिना स्पष्ट कारण बताए काट दिए गए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नाम हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और कारण जरूरी हैं, तो बिना कारण वाले आवेदनों के आधार पर मतदाताओं के नाम कैसे हटाए गए। उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव से पहले इस प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्षी मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए किया जा सकता है।

AAP सांसद ने चुनाव आयोग से ऐसे मामलों की जांच कराने और प्रभावित मतदाताओं के नाम हटाने के आधार सार्वजनिक करने की मांग की। उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तरबगंज में रेशमा के नाम से 188 आवेदन देने का दावा

संजय सिंह ने गोंडा जिले की तरबगंज विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि रेशमा नाम की एक महिला के नाम से 188 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए गए। उनके मुताबिक, संबंधित महिला के बारे में जानकारी जुटाने पर उसका पता नहीं चल सका।

उन्होंने सवाल उठाया कि एक व्यक्ति के नाम से इतनी बड़ी संख्या में आवेदन कैसे जमा हुए और उनकी सत्यता की जांच किस तरह की गई। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

कई नामों से बड़ी संख्या में आवेदन आने का दावा

प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदनों के आंकड़े भी रखे। उनके दावों के अनुसार:

  • बाबूराम: 237 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन, जिनमें 212 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • रेशमा: 188 आवेदन, जिनमें 174 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • निशा: 124 आवेदन, जिनमें 109 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • धीरज कुमार भारती: 112 आवेदन, जिनमें 97 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • कुमार कमलेश: 75 आवेदन, जिनमें 65 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • बृज मोहन: 66 आवेदन, जिनमें 63 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • देवदत्त: 62 आवेदन, जिनमें 59 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • आदर्श कुमार पांडे: 61 आवेदन, जिनमें 56 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • जसबंध: 59 आवेदन, जिनमें 55 मुस्लिम मतदाता बताए गए।
  • पीलीभीत के नरेंद्र कुमार तिवारी: 56 आवेदन, जिनमें 50 मुस्लिम मतदाता बताए गए।

संजय सिंह ने कहा कि इन आंकड़ों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित आवेदनों के आधार पर नाम हटाने की प्रक्रिया किन नियमों के तहत की गई। इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

चुनाव आयोग के पुराने स्पष्टीकरण का भी है संदर्भ

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इससे पहले मतदाता सूची में कथित तौर पर अतिरिक्त नाम जुड़ने को लेकर सामने आए एक दावे पर स्पष्टीकरण दिया था। 7 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा था कि पुनरीक्षण के दौरान एकत्र किए गए फॉर्म-6 आवेदनों की संख्या को स्वतः मतदाता सूची में जोड़े गए नामों की संख्या नहीं माना जा सकता। आयोग के पक्ष के मुताबिक, ऐसे आवेदनों का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया था।

ऐसे में संजय सिंह द्वारा उठाए गए सवालों के साथ-साथ चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और संबंधित आधिकारिक आंकड़ों का मिलान भी महत्वपूर्ण है। फर्जी नाम जोड़े जाने या नियमों के विरुद्ध नाम हटाए जाने की पुष्टि जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।

योगी और पंकज चौधरी के बयानों पर भी उठाए सवाल

संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के बयानों का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग से पूछा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित जानकारी पूरी तरह सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।

उन्होंने मांग की कि आयोग विधानसभा और बूथ स्तर पर नए जोड़े गए मतदाताओं तथा हटाए गए नामों का विवरण उपलब्ध कराए। उनके अनुसार, पारदर्शी जानकारी से राजनीतिक दल और मतदाता सूची की जांच कर सकेंगे।

निष्पक्ष जांच की मांग

AAP सांसद ने चुनाव आयोग से राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष तरीके से मतदाता सूची की जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका दूर करना जरूरी है, ताकि योग्य मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें।

फिलहाल इस मामले में संजय सिंह के आरोपों और चुनाव आयोग के उपलब्ध स्पष्टीकरण के बीच आंकड़ों का स्पष्ट मिलान तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम होगी।

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