रूस से तेल खरीदने पर भारत को ट्रंप की राहत, 5 देशों को टैरिफ से फिलहाल छूट

“डोनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत, चीन समेत पांच देशों को प्रस्तावित टैरिफ से फिलहाल राहत दी। जानें फैसले का भारत पर संभावित असर और छूट की अवधि से जुड़ी अहम बातें।“

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को प्रस्तावित व्यापार शुल्क और प्रतिबंधों से फिलहाल राहत दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने रूस से जुड़े कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।

इस फैसले से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की आशंका फिलहाल टल गई है। हालांकि, यह राहत कितने समय तक जारी रहेगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी प्रशासन भविष्य में परिस्थितियों की समीक्षा के बाद इस फैसले में बदलाव कर सकता है।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर था भारी टैरिफ का प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त शुल्क लगाने से संबंधित कानून का प्रावधान किया गया था। इसके तहत रूस के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की व्यवस्था प्रस्तावित थी।

इस कानून का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसके ऊर्जा कारोबार से होने वाली आय को सीमित करना बताया गया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम इस पहल के प्रमुख समर्थकों में शामिल रहे हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ देशों पर 100 प्रतिशत या इससे अधिक टैरिफ लगाए जाने की आशंका जताई गई थी। ऐसे में ताजा छूट से भारत सहित संबंधित देशों को फिलहाल राहत मिली है।

भारत और चीन को क्यों मिली राहत?

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। चीन भी रूसी तेल का प्रमुख खरीदार है। रूस से ऊर्जा आयात पर अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क लगाए जाने की स्थिति में दोनों देशों के व्यापार और ऊर्जा लागत पर असर पड़ सकता था।

ट्रंप प्रशासन के ताजा फैसले के बाद फिलहाल इन देशों पर प्रस्तावित शुल्क लागू नहीं होंगे। हालांकि, इससे भारत-अमेरिका के बीच सभी व्यापार शुल्क समाप्त होने का अर्थ नहीं है। राहत का दायरा रूस से जुड़े प्रस्तावित प्रतिबंधों और टैरिफ तक सीमित बताया गया है।

कार्यकारी आदेश में राष्ट्रहित का हवाला

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में संबंधित प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने से छूट देने की जानकारी दी। उन्होंने इस कदम को अमेरिकी राष्ट्रहित में लिया गया फैसला बताया और कांग्रेस को इससे संबंधित प्रमाण-पत्र सौंपने का उल्लेख किया।

इस फैसले की अवधि और आगे की शर्तों को लेकर स्पष्टता जरूरी है। आदेश में दी गई छूट स्थायी है या अस्थायी, इसका आकलन आधिकारिक दस्तावेजों और आगे जारी होने वाले निर्देशों के आधार पर किया जाना चाहिए।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच आया फैसला

अमेरिका का यह कदम रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध तथा मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ट्रंप पहले भी दोनों देशों से युद्ध समाप्त करने की अपील कर चुके हैं।

रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था। फिलहाल छूट देने के फैसले से यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई के लिए परिस्थितियों की समीक्षा कर सकता है।

क्या है ग्राहम एक्ट?

रिपोर्ट में जिस ग्राहम एक्ट का उल्लेख किया गया है, उसका उद्देश्य रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था करना बताया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत कुछ देशों पर 100 से 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना का जिक्र किया गया था।

हालांकि, किसी कानून के प्रस्तावित प्रावधानों, उसके लागू होने और कार्यकारी आदेश से मिली छूट के बीच अंतर होता है। इसलिए टैरिफ की वास्तविक दर, छूट की अवधि और उसके कानूनी दायरे की पुष्टि आधिकारिक अमेरिकी दस्तावेजों से की जानी चाहिए।

भारत के लिए क्या मायने हैं? रूस से तेल आयात पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ का जोखिम फिलहाल कम होने से भारत को व्यापारिक अनिश्चितता से राहत मिल सकती है। लेकिन इसे स्थायी छूट या भारत-अमेरिका के सभी व्यापारिक विवादों के समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगी।

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