लखनऊ में व्यापारी से कथित वसूली के मामले में राज्य कर विभाग ने SIB डिप्टी कमिश्नर संजीव निरंजन को पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया। डीएम विशाख जी को 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
लखनऊ। व्यापारी से कथित वसूली के मामले में उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग ने बड़ी विभागीय कार्रवाई की है। लखनऊ की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) के डिप्टी कमिश्नर संजीव निरंजन को उनके पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उन पर व्यापारी को विभागीय कार्रवाई और छापे का डर दिखाकर रुपये मांगने के आरोपों की जांच चल रही है। शासन ने पूरे प्रकरण की जांच लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी को सौंपी है। उन्हें एक पखवारे के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करानी होगी।
इस मामले में विभागीय कार्रवाई की शुरुआत करीब एक पखवारे पहले हुई थी। लखनऊ के एक व्यापारी ने राज्य कर आयुक्त नितिन बंसल से गोपनीय शिकायत की थी। व्यापारी का आरोप था कि एसआईबी के कुछ कर्मचारी विभागीय कार्रवाई और छापे का भय दिखाकर उनसे रुपये मांग रहे हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में संबंधित बातचीत की ऑडियो क्लिप भी विभाग को उपलब्ध कराई थी।
ऑडियो क्लिप के आधार पर शुरू हुई थी विभागीय जांच
व्यापारी की शिकायत मिलने के बाद राज्य कर विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई। इस दौरान उपलब्ध कराई गई ऑडियो क्लिप और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की गई। प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने एसआईबी से जुड़े लिपिक विकास वर्मा को निलंबित कर दिया था।
हालांकि, मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहा। आगे की जांच में एसआईबी की लखनऊ इकाई के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। इसी क्रम में डिप्टी कमिश्नर संजीव निरंजन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। विभागीय स्तर पर उनकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद राज्य कर आयुक्त ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की थी।
प्रमुख सचिव के आदेश पर पद से हटाए गए संजीव निरंजन
प्रकरण में सामने आए तथ्यों और विभागीय संस्तुति के बाद प्रमुख सचिव कामिनी रतन चौहान ने संजीव निरंजन को डिप्टी कमिश्नर के पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध करने का आदेश जारी किया। इस कार्रवाई के साथ ही उनके कामकाज और पूरे मामले में उनकी भूमिका की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
फिलहाल उन्हें मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। यह कार्रवाई जांच की प्रक्रिया के तहत की गई है। व्यापारी की ओर से लगाए गए वसूली के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट और आगे की विभागीय कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी।
डीएम विशाख जी को 15 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
शासन ने पूरे प्रकरण की जांच लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी को सौंपी है। उन्हें एक पखवारे के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कथित वसूली के प्रयास में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका थी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई और मामले में अन्य अधिकारियों की संलिप्तता तो नहीं है।
जिलाधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन और राज्य कर विभाग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें रहेंगी। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि व्यापारी की शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में विभागीय स्तर पर क्या तथ्य सामने आते हैं।









