“तीन बच्चों की हत्या मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औरैया में तीन बच्चों की हत्या के मामले में प्रियंका और आशीष को बरी कर दिया। कोर्ट ने आठ वर्षीय सोनू की गवाही को अविश्वसनीय माना।“
प्रयागराज/औरैया: औरैया ट्रिपल मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन बच्चों की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई मां प्रियंका और सह-आरोपी आशीष उर्फ डैनी को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों आरोपितों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को रद कर दिया, जिसमें प्रियंका को मौत की सजा और आशीष को उम्रकैद सुनाई गई थी। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि दोनों किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।
27 जून 2024 को सेंगर नदी से मिले थे तीन बच्चों के शव
यह मामला 27 जून 2024 का है। औरैया जिले में सेंगर नदी के पास तीन बच्चों माधव, आदित्य और मंगल के शव बरामद हुए थे। अभियोजन का आरोप था कि प्रियंका अपने चारों बेटों को नदी के पास लेकर गई थी और वहां बच्चों को डुबोने की कोशिश की गई। इस घटना में तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि सबसे बड़ा बेटा सोनू बच गया।
मामले में पुलिस ने प्रियंका और आशीष के खिलाफ कार्रवाई की थी। बाद में मुकदमा अदालत पहुंचा और अभियोजन ने जीवित बचे सोनू की गवाही को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया।
निचली अदालत ने प्रियंका को सुनाई थी फांसी
मामले की सुनवाई के बाद औरैया की सत्र अदालत ने जुलाई 2025 में प्रियंका को हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई थी, जबकि आशीष को उम्रकैद की सजा दी गई थी। दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया था। निचली अदालत के फैसले में सोनू की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया था।
इसके बाद दोनों आरोपितों की ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने मामले के साक्ष्यों और गवाही की दोबारा समीक्षा की।
आठ वर्षीय सोनू की गवाही पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट के फैसले में बाल गवाह सोनू की गवाही को विशेष रूप से परखा गया। अदालत ने गवाही में ऐसे विरोधाभास पाए, जिन्हें दूर नहीं किया जा सका। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के कई दिन बाद सोनू का पुलिस बयान दर्ज किया गया था, जिसे भी अदालत ने महत्वपूर्ण परिस्थितियों में शामिल माना।
अदालत ने यह भी कहा कि बच्चे की कम उम्र अपने आप में उसे गवाही देने के लिए अयोग्य नहीं बनाती। हालांकि, बाल गवाह के बयान की विश्वसनीयता की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी होती है।
‘सिखाई गई गवाही’ के संकेत मिलने की बात
हाईकोर्ट ने सोनू के बयान में ऐसे संकेत पाए, जिनसे अदालत को लगा कि उसकी गवाही प्रभावित या सिखाई गई हो सकती है। अदालत ने माना कि केवल ऐसी गवाही के आधार पर दोषसिद्धि कायम रखना उचित नहीं होगा।
इसके अलावा मामले की विवेचना और कुछ महत्वपूर्ण गवाहों से संबंधित कमियों को भी हाईकोर्ट ने ध्यान में रखा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, घटना की सूचना देने वाले ग्राम प्रधान की गवाही और सोनू के शुरुआती घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाए।
अभियोजन अपराध को संदेह से परे साबित नहीं कर सका
हाईकोर्ट का मूल निष्कर्ष यह रहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन दोनों आरोपितों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर खंडपीठ ने निचली अदालत के निर्णय को रद करते हुए दोनों को बरी कर दिया।
इस फैसले के साथ औरैया में तीन बच्चों की मौत से जुड़े इस चर्चित मामले में प्रियंका और आशीष के खिलाफ निचली अदालत की दोषसिद्धि और सजा समाप्त हो गई।
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