“सीएम योगी आदित्यनाथ 18 से 20 अक्टूबर तक गोरखनाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान करेंगे। महानिशा पूजा, कन्या पूजन और विजयादशमी शोभायात्रा के कार्यक्रमों की पूरी जानकारी पढ़ें।“
गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ रविवार से मंगलवार तक गोरखनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्र के विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक आयोजनों में शामिल होंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इन कार्यक्रमों में महानिशा पूजा, हवन, कन्या पूजन, महायोगी गुरु गोरखनाथ की विशेष आराधना और विजयादशमी शोभायात्रा प्रमुख रूप से शामिल हैं। गोरक्षपीठ की इन परंपराओं का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ गोरखपुर की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत से भी गहरा जुड़ाव है।
गोरक्षपीठ में नवरात्र की प्रतिपदा से ही विशेष पूजन-अर्चन का सिलसिला जारी है। अब अष्टमी से विजयादशमी तक के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों को लेकर गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक तैयारियां की जा रही हैं।
अष्टमी पर महानिशा पूजा और हवन करेंगे योगी आदित्यनाथ
शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि रविवार, 18 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ में महानिशा पूजा और हवन करेंगे। इस दौरान विधि-विधान से देवी आराधना कर लोकमंगल की कामना की जाएगी। गोरक्षपीठ में महानिशा पूजा नवरात्र के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में गिनी जाती है।
नवरात्र की शुरुआत में गोरक्षपीठाधीश्वर ने गोरखनाथ मंदिर स्थित शक्तिपीठ में कलश स्थापना की थी। इसके बाद से नियमित पूजन-अर्चन की जिम्मेदारी उनके प्रतिनिधि के रूप में मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ निभा रहे हैं। अष्टमी से विजयादशमी तक के प्रमुख अनुष्ठानों में योगी आदित्यनाथ स्वयं उपस्थित रहकर पीठ की धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे।
नवमी पर नौ कन्याओं का पूजन, बटुक पूजा भी होगी
सोमवार, 19 अक्टूबर को महानवमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन का आयोजन होगा। पूर्वाह्न 11 बजे से होने वाले इस अनुष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नौ दुर्गा स्वरूपा नौ कुंवारी कन्याओं का पूजन करेंगे। यह परंपरा मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और भारतीय धार्मिक संस्कृति में कन्याओं के महत्व को दर्शाती है।
अनुष्ठान के दौरान कन्याओं के पैर पखारे जाएंगे। उनके माथे पर रोली, चंदन, दही और अक्षत का तिलक लगाकर विधि-विधान से पूजा की जाएगी। इसके बाद उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाएगा और दक्षिणा तथा उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाएगा। मंदिर की परंपरा के अनुसार इस अवसर पर बटुक पूजन भी किया जाएगा।
गोरक्षपीठ में कन्या पूजन नवरात्र के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। इसके माध्यम से शक्ति स्वरूपा कन्याओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
विजयादशमी पर गुरु गोरखनाथ की विशेष पूजा
मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में महायोगी गुरु गोरखनाथ की विशेष पूजा-अर्चना होगी। इसके बाद गोरक्षपीठाधीश्वर के तिलकोत्सव का पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी देंगे।
विजयादशमी गोरक्षपीठ के वार्षिक धार्मिक आयोजनों में विशेष स्थान रखती है। इस दिन मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शाम को गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में भव्य विजयादशमी शोभायात्रा निकाली जाएगी।
गोरखनाथ मंदिर से मानसरोवर मंदिर तक निकलेगी शोभायात्रा
गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार विजयादशमी की शाम गोरखनाथ मंदिर से शोभायात्रा शुरू होगी। तुरही, नगाड़े और बैंड-बाजे की धुन के बीच निकलने वाली इस यात्रा में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे।
शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंचेगी, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद यात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगी। यहां आयोजित रामलीला में वह भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे। इस दौरान भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमानजी का पूजन कर आरती भी उतारी जाएगी।
यह आयोजन विजयादशमी के धार्मिक महत्व को दर्शाने के साथ-साथ गोरखपुर की सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखता है।
सामाजिक समरसता का प्रतीक है गोरक्षपीठ की विजयादशमी शोभायात्रा
गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली विजयादशमी शोभायात्रा गोरखपुर की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न वर्गों के लोग भाग लेते हैं। शोभायात्रा का स्वागत भी समाज के अलग-अलग समुदायों की ओर से किया जाता है।
उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन चौधरी कैफुलवरा के अनुसार, उनका परिवार तीन पीढ़ियों से इस शोभायात्रा का स्वागत करता आ रहा है। उन्होंने बताया कि मंदिर के मुख्य द्वार से कुछ दूरी पर लोग घंटों पहले फूल-मालाएं लेकर गोरक्षपीठाधीश्वर के स्वागत के लिए खड़े हो जाते हैं।
मुस्लिम और बुनकर समाज के लोगों की भागीदारी इस आयोजन को सामाजिक सौहार्द और आपसी सहभागिता का उदाहरण बनाती है। यही वजह है कि विजयादशमी शोभायात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गोरखपुर की साझा सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
विजयादशमी पर मंदिर में होगा पारंपरिक भोज
विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक भोज का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के शामिल होने की परंपरा है। इस आयोजन का उद्देश्य सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सामूहिक सहभागिता और सद्भाव की भावना को मजबूत करना है।
इस प्रकार 18 से 20 अक्टूबर तक गोरक्षपीठ में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान नवरात्र की आराधना से लेकर विजयादशमी के उत्सव तक की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। महानिशा पूजा, कन्या पूजन, गुरु गोरखनाथ की विशेष आराधना और शोभायात्रा के माध्यम से गोरक्षपीठ की धार्मिक विरासत और गोरखपुर की सामाजिक समरसता की झलक देखने को मिलेगी।
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