“मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में लोन पास न होने की बड़ी वजह सामने आई है। निजी बैंकों के असहयोग से फाइलें अटक रहीं हैं, जबकि सरकारी बैंक लक्ष्य से आगे निकल गए हैं।“
लखनऊ: योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ में लोन स्वीकृति की रफ्तार धीमी पड़ने की बड़ी वजह सामने आई है। योजना में निजी बैंकों का असहयोग लक्ष्य प्राप्ति में बड़ी बाधा बन रहा है।
सरकार के अनुसार, कई निजी बैंक युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण देने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। HDFC Bank, ICICI Bank, IDBI Bank और Axis Bank जैसे बड़े बैंकों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है।
सरकारी बैंकों ने किया बेहतर प्रदर्शन
जहां निजी बैंक पीछे हैं, वहीं सरकारी बैंकों ने योजना में शानदार प्रदर्शन किया है। State Bank of India, Bank of Baroda और Punjab National Bank समेत कई बैंकों ने 100% से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने 1.5 लाख युवाओं को ऋण दिलाने का लक्ष्य रखा था, जिसमें से करीब 1.30 लाख लाभार्थियों को लोन मिल चुका है—जिसमें अधिकांश योगदान सरकारी बैंकों का है।
सरकार का सख्त रुख
निजी बैंकों के रवैये से नाराज सरकार अब सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। चर्चा है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो इन बैंकों में सरकारी धनराशि जमा करने पर रोक लगाई जा सकती है।
हाल ही में हुई स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) की बैठक में भी निजी बैंकों की उदासीनता पर नाराजगी जताई गई।
योजना की खासियत
इस योजना के तहत सरकार मार्जिन मनी और ब्याज का बोझ खुद उठाती है, जिससे युवाओं को व्यवसाय शुरू करने में आर्थिक राहत मिलती है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में लोन न मिलने की सबसे बड़ी वजह निजी बैंकों का कमजोर सहयोग है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सरकार कड़े फैसले ले सकती है।
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