“सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में 3 साल की बच्ची के रेप केस में हरियाणा पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि थाने बुलाना संवेदनहीनता है। SIT जांच के आदेश, CWC को नोटिस।“
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में हरियाणा पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इसे “संवेदनहीन” और “शर्मनाक” करार दिया।
बच्ची को बार-बार थाने बुलाने पर सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि इतनी छोटी बच्ची को बार-बार थाने क्यों बुलाया गया, जबकि पुलिस खुद उसके घर जाकर बयान दर्ज कर सकती थी। अदालत ने कहा कि यह गंभीर संवेदनहीनता का मामला है।
पॉक्सो कानून का उल्लंघन
कोर्ट ने पाया कि बच्ची का बयान आरोपी के सामने दर्ज किया गया, जो POCSO Act के नियमों का सीधा उल्लंघन है। बच्ची को आरोपी के सामने बंद कमरे में रखने पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी पर भी फटकार
अदालत ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। बच्ची को बार-बार कमेटी के सामने पेश किया गया, कई बार माता-पिता की गैरमौजूदगी में पूछताछ की गई। कोर्ट ने कमेटी सदस्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
SIT जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। यह टीम वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारियों की होगी।
साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया है कि सभी केस रिकॉर्ड तुरंत SIT को सौंपे जाएं और संबंधित अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हों।
सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी न केवल पुलिस और संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और कानून का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए
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