“IIT Baba Marriage News 2026: अभय सिंह ने महाशिवरात्रि के दिन कर्नाटक की इंजीनियर प्रतीका से शादी की। प्रयागराज महाकुंभ में चर्चा में आए IIT बाबा की शादी पर संत समाज में बहस छिड़ी।”
प्रयागराज/धर्मशाला। महाकुंभ 2026 में चर्चा में रहे ‘IITian बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध अभय सिंह ने संन्यास का मार्ग छोड़कर गृहस्थ जीवन अपना लिया है। उन्होंने कर्नाटक की इंजीनियर प्रतीका के साथ विवाह कर लिया, जिसके बाद संत समाज और सोशल मीडिया में बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, अभय सिंह ने 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर धर्मशाला के निकट अघंजर महादेव मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह किया। इसके बाद 19 फरवरी को दोनों ने कोर्ट मैरिज भी की। विवाह के बाद दंपति फिलहाल धर्मशाला में रह रहा है।
आईआईटी से संन्यास तक का सफर
मूल रूप से हरियाणा के हिसार निवासी अभय सिंह ने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने विदेश में उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपना लिया था। महाकुंभ 2026 में उनकी उपस्थिति और विचारों ने उन्हें युवाओं के बीच खास पहचान दिलाई थी।
महाकुंभ में भी रहे थे चर्चा में
महाकुंभ के दौरान अभय सिंह के अचानक गायब होने और उनके कुछ बयानों को लेकर विवाद भी हुआ था। उनके परिवार के लोग उन्हें खोजते हुए प्रयागराज पहुंचे थे। बाद में उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
संत समाज में मतभेद
इस विवाह को लेकर संत समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
प्रयागराज के कुछ संतों का कहना है कि संन्यास एक बार लेने के बाद विवाह करना परंपरा के विरुद्ध है और इससे गलत संदेश जाता है।
वहीं, वाराणसी के कुछ संतों का मानना है कि हिंदू धर्म में गृहस्थ आश्रम भी उतना ही महत्वपूर्ण है और इसे व्यक्तिगत निर्णय के रूप में देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
IITian बाबा की शादी को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है।
कुछ लोग इसे पाखंड बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार मान रहे हैं।
मुख्य प्रश्न बना—परंपरा या व्यक्तिगत अधिकार
यह मामला अब एक बड़े सवाल के रूप में उभर रहा है कि क्या संन्यास के बाद व्यक्ति को विवाह का अधिकार होना चाहिए। धर्म और आधुनिक सोच के बीच यह बहस और तेज होती दिख रही है।
IITian बाबा का विवाह केवल एक निजी घटना नहीं, बल्कि बदलते समाज में आध्यात्मिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन का प्रतीक बन गया है। आने वाले समय में इस पर और बहस होने की संभावना है।








