“IIT दिल्ली PhD छात्र मौत मामले में मनीष आनंद का एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। 18 अगस्त को तबीयत बिगड़ने के बाद भर्ती कराया गया था। पुलिस जांच जारी है।“
नई दिल्ली। IIT दिल्ली PhD छात्र मौत के मामले ने संस्थान में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी चुनौतियों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बायोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलाजी विभाग में PhD कर रहे छात्र मनीष आनंद का करीब डेढ़ महीने तक उपचार चलने के बाद 3 अक्टूबर को एम्स में निधन हो गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 18 अगस्त को उनकी तबीयत बिगड़ी थी, जिसके बाद उन्हें एम्स के जेपीएन एपेक्स ट्रामा सेंटर ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें ICU में भर्ती किया था।
18 अगस्त को बिगड़ी थी मनीष आनंद की तबीयत
मनीष आनंद IIT दिल्ली के पास कटवारिया सराय स्थित एक PG में रहते थे। 18 अगस्त को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स ट्रामा सेंटर पहुंचाया गया।
बताया गया है कि उन्होंने नींद की गोलियां खाई थीं। घटना के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी और चिकित्सकीय निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया। करीब डेढ़ महीने तक इलाज चलने के बाद 3 अक्टूबर को उनकी मृत्यु हो गई।
परिवार के सदस्य अस्पताल में रहे मौजूद
इलाज के दौरान मनीष आनंद के परिवार के सदस्य अस्पताल में उनके साथ रहे। उनके निधन की सूचना IIT दिल्ली प्रशासन को मिलने के बाद संस्थान में शोक का माहौल है।
डीन स्टूडेंट अफेयर्स की ओर से छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को ई-मेल के माध्यम से उनके निधन की जानकारी दी गई। प्रशासन ने परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही है।
मौत की परिस्थितियों की पुलिस कर रही जांच
मनीष आनंद ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसके पीछे व्यक्तिगत, शैक्षणिक या अन्य कोई वजह थी या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
ऐसे में घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। संस्थान की ओर से भी छात्रों को भेजे गए संदेश में बताया गया है कि मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच नियमानुसार की जा रही है।
IIT दिल्ली में डेढ़ महीने में दूसरी छात्र मौत
मनीष आनंद का निधन ऐसे समय हुआ है जब IIT दिल्ली में इससे पहले भी एक छात्र की मौत का मामला सामने आ चुका है। एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त को मौत हुई थी। उस घटना की परिस्थितियों की जांच के लिए संस्थान की ओर से समिति गठित की गई थी।
एक मामले की जांच चल रही थी कि अब PhD छात्र मनीष आनंद के निधन की घटना सामने आ गई। लगातार सामने आई छात्र मौतों ने संस्थान में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई से जुड़े दबाव और कठिन परिस्थितियों में समय पर सहायता उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।
छात्रों से काउंसलिंग सेवाओं का लाभ लेने की अपील
IIT दिल्ली प्रशासन ने मनीष आनंद के निधन पर छात्रों से एक-दूसरे का सहयोग करने की अपील की है। संस्थान ने छात्रों को कठिन परिस्थितियों में उपलब्ध काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी है।
प्रशासन की ओर से मनीष आनंद की स्मृति में शोक सभा आयोजित किए जाने की भी जानकारी दी गई है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थानों की जिम्मेदारी अहम
उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई, शोध, करियर और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियां कई बार छात्रों के लिए कठिन हो सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर सहायता, भरोसेमंद संवाद और काउंसलिंग सेवाओं तक आसान पहुंच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
IIT दिल्ली में सामने आई लगातार छात्र मौतों के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि छात्रों को मानसिक और भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। हालांकि मनीष आनंद की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
IIT दिल्ली PhD छात्र मौत मामले में फिलहाल पुलिस जांच जारी है। इसलिए घटना के पीछे की वजह को लेकर सामने आ रही प्रारंभिक जानकारियों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मनीष आनंद की मौत की परिस्थितियां क्या थीं।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”








