“ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के 27वें दिन अमेरिका ने दावा किया कि 10,000 ठिकानों पर हमला कर 92% ईरानी नौसेना को नष्ट कर दिया गया। इस्फहान में भारी हमले, खाड़ी देशों में तनाव बढ़ा।“
नई दिल्ली/पश्चिम एशिया: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध अब और अधिक गंभीर और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। जंग के 27वें दिन अमेरिका ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने अब तक ईरान के 10,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और उसकी 92 प्रतिशत नौसैनिक क्षमता को नष्ट कर दिया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
इसी बीच इस्फहान शहर में गुरुवार सुबह कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के आसपास स्थित एयरबेस और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इस्फहान ईरान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और रक्षा केंद्र है, जहां कई संवेदनशील संस्थान मौजूद हैं।
इजरायल का समन्वित हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने ईरान के विभिन्न हिस्सों में एक साथ कई हमले किए। इन हमलों में हथियार निर्माण इकाइयों, रक्षा उत्पादन केंद्रों और सैन्य ढांचे से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इजरायली सेना ने इन हमलों को “सटीक और रणनीतिक” बताया है। हालांकि, ईरान की ओर से अब तक नुकसान के आंकड़ों को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
अमेरिका का दावा और सैन्य रणनीति
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि युद्ध की शुरुआत से अब तक 10,000 से अधिक लक्ष्यों पर सटीक हमले किए गए हैं। इसके साथ ही यह भी दावा किया गया है कि ईरान की नौसेना के 92% बड़े युद्धपोत और जहाज नष्ट कर दिए गए हैं, जिससे उसकी समुद्री ताकत को बड़ा झटका लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सही है, तो क्षेत्र में ईरान की सामरिक स्थिति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव
संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। कुवैत के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद फ्यूल टैंक में आग लग गई, जिससे हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं।
वहीं बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में सायरन बजने और सुरक्षा अलर्ट जारी होने की खबरें हैं। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने अपने पूर्वी क्षेत्र में कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ती सख्ती
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, इस समय तनाव का केंद्र बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों की कड़ी निगरानी कर रहा है और कुछ मामलों में नियंत्रण भी स्थापित कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कूटनीतिक प्रयासों को झटका
युद्ध के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे के साथ किसी भी तरह की बातचीत या समझौते की खबरों को खारिज कर दिया है।
अमेरिका का कहना है कि अभी कोई औपचारिक वार्ता नहीं हो रही, जबकि ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह मौजूदा परिस्थितियों में किसी बातचीत की योजना नहीं बना रहा है।
कुल मिलाकर स्थिति
लगातार हमलों, बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और असफल कूटनीतिक प्रयासों के बीच यह संघर्ष अब एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ना तय है।
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