लखनऊ कमिश्नरेट में प्रशिक्षण कार्यक्रम, न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर

122 पुलिस कर्मियों को मिला प्रशिक्षण; न्यायालय-थाना समन्वय और तकनीकी दक्षता पर दिया गया जोर

लखनऊ पुलिस ने पैरोकारों के कार्य एवं कर्तव्यों पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। 122 पुलिसकर्मियों ने भाग लिया, न्यायालय-थाना समन्वय और तकनीकी दक्षता पर जोर।

लखनऊ। पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु बनाने के उद्देश्य से लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा शनिवार को “पैरोकारों के कार्य एवं कर्तव्य” विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित संगोष्ठी सदन में संपन्न हुआ।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम Amrendra Kumar Sengar के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) Aparna Kumar, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) Bablu Kumar तथा पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) Amit Kumawat का विशेष मार्गदर्शन रहा। वहीं, कार्यशाला का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) Saumya Pandey के पर्यवेक्षण में किया गया।

122 कर्मियों की सहभागिता, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धति का उपयोग
कार्यशाला में पुलिस कमिश्नरेट की विभिन्न इकाइयों से कुल 122 पुलिस कर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण को आधुनिक तकनीकी संसाधनों और उन्नत पद्धतियों के माध्यम से संचालित किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर दक्ष बनाया जा सके।

विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
प्रशिक्षण सत्र में प्रशिक्षक Pratyush Dubey द्वारा पैरोकारों को उनके दायित्वों और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने न्यायालय और थाना के बीच समन्वय की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए प्रभावी कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया।

न्यायालय-थाना समन्वय पर विशेष फोकस
कार्यशाला के दौरान पैरोकारों को निम्न बिंदुओं पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया—

  • न्यायालय के निर्देशों को समयबद्ध तरीके से थानों तक पहुंचाना
  • थानों की रिपोर्ट न्यायालय में समय से प्रस्तुत करना
  • सम्मन और वारंट की प्रक्रिया में समन्वय सुनिश्चित करना
  • लंबित मामलों और पुरानी कोर्ट फाइलों की नियमित समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करना

प्रशिक्षण का उद्देश्य और आगे की योजना
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पैरोकारों को अधिक जिम्मेदार, जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना रहा, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में देरी को कम किया जा सके।

भविष्य की कार्ययोजना के तहत ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, तकनीकी दक्षता बढ़ाने, कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने और न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर लगातार ध्यान दिया जाएगा।

कार्यशाला को प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और प्रभावी बताया। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने और जनसेवा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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