SIR विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वोटर लिस्ट में बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करने समेत पांच मांगें रखीं। जानिए कांग्रेस की मांगें और चुनाव आयोग का पक्ष।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े नियमों को लेकर कांग्रेस ने अपना अभियान तेज करने का ऐलान किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में हुए बदलावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग रखी।
खरगे ने आरोप लगाया कि SIR और वोटर रजिस्ट्रेशन के नियमों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को आगे प्रमुखता से उठाएगी।
कांग्रेस ने वोटर लिस्ट को लेकर उठाए कई सवाल
खरगे ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, डुप्लीकेट वोटर, संदिग्ध पते, एक ही पते पर कई मतदाताओं के पंजीकरण और फॉर्म-6 से संबंधित प्रविष्टियों पर सवाल उठाए। फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि इन मामलों में चुनाव आयोग को अधिक गंभीरता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची को लेकर उठाए गए सवालों का भी समर्थन किया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को कानूनी और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप बताया है। आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि आयुक्तों के बीच विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR से जुड़े फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को भी मुद्दा बनाया है। पार्टी का कहना है कि नियमों में बदलाव से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में सामने आई रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से फॉर्म-6 में किए गए कुछ बदलावों को लेकर आपत्ति जताए जाने का उल्लेख किया गया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं और निर्णयों को वैधानिक व्यवस्था के तहत बताता रहा है।
SIR में हटाए गए नामों पर क्या बोली कांग्रेस?
खरगे ने मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने तथा अपील करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को SIR के दौरान नोटिस पाने वाले ऐसे लोगों के लिए प्रक्रिया में बदलाव की जानकारी दी थी, जिनके मामले में दस्तावेज या तार्किक विसंगतियों को लेकर सवाल हैं। आयोग के अनुसार, ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) संबंधित मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं।
कांग्रेस की पांच प्रमुख मांगें
CWC की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं।
1. वोटर लिस्ट में बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो
कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची में किए गए बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी दी जाए और उन्हें अपील का पूरा अवसर मिले।
2. राजनीतिक दलों को समय पर मिले जरूरी डेटा
कांग्रेस ने मांग की कि राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक आंकड़े समय पर तथा ऐसे प्रारूप में उपलब्ध कराए जाएं, जिसे आसानी से समझा और इस्तेमाल किया जा सके।
3. गंभीर गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच
जहां गंभीर अनियमितताओं के आरोप या शिकायतें सामने आती हैं, वहां तय समयसीमा के भीतर स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग कांग्रेस ने की है।
4. चुनावी डेटा और फैसलों में पारदर्शिता
पार्टी का कहना है कि चुनाव से जुड़े डेटा और निर्णयों में पर्याप्त पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि किसी भी राजनीतिक दल को यह आशंका न रहे कि महत्वपूर्ण जानकारी उससे छिपाई जा रही है।
5. मतदाताओं का भरोसा कायम रहे
खरगे ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है और चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास किया जा सकता है।
CEC और प्रधानमंत्री पर भी खरगे का हमला
CWC बैठक में खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है और इसके लिए केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए।
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उन पर चुनाव आयोग के कामकाज को प्रभावित करने का दबाव था। ये कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से इस विवाद पर अलग-अलग प्रक्रियात्मक एवं कानूनी पक्ष रखे गए हैं।
‘वोट की नोटबंदी’ का दिया उदाहरण
खरगे ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर ‘वोट की नोटबंदी’ जैसा राजनीतिक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दौरान लोगों को बैंकों की कतारों में खड़ा होना पड़ा था, जबकि उनके मुताबिक मतदाता सूची से नाम हटने की स्थिति में कुछ मतदाता मतदान के अधिकार से ही बाहर हो सकते हैं।
कांग्रेस का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की पूरी जानकारी और उस पर कार्रवाई की प्रक्रिया सार्वजनिक होनी चाहिए। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है और पात्र मतदाताओं के दावों एवं आपत्तियों के लिए व्यवस्था मौजूद है।
SIR विवाद के बीच आगे बढ़ेगा राजनीतिक टकराव
मतदाता सूची के SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रहने की संभावना है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दा बनाकर आगे उठाने का फैसला किया है, जबकि आयोग अपने निर्णयों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”








