"मध्य-पूर्व में तनाव के बीच UAE ने पाकिस्तान से 2 अरब डॉलर के लोन की वापसी की मांग की है। शहबाज शरीफ सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, IMF और विदेशी मुद्रा भंडार पर इसके असर के बारे में जानें।"
इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। United Arab Emirates ने पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर (करीब 18,600 करोड़ रुपये) के कर्ज की तत्काल वापसी की मांग कर दी है।
पाकिस्तान ने इस मांग को स्वीकार करते हुए अप्रैल के अंत तक पूरी रकम लौटाने का फैसला किया है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति पर नया दबाव बन गया है।
भू-राजनीतिक हालात बने वजह
सूत्रों के मुताबिक, ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए UAE ने अपने फंड को सुरक्षित करने का फैसला लिया है। पहले यह कर्ज हर साल “रोलओवर” किया जाता था, लेकिन अब इसे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर असर
यह रकम State Bank of Pakistan में जमा थी, जिस पर पाकिस्तान करीब 6% ब्याज भी दे रहा था।
हालांकि पाकिस्तान के पास करीब 21 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन इतनी बड़ी राशि एक साथ लौटाने से उस पर भारी दबाव पड़ेगा।
अन्य कर्जदाताओं का भी दबाव बढ़ सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि UAE के इस कदम के बाद:
- China
- Saudi Arabia
जैसे अन्य कर्जदाता भी अपनी शर्तें सख्त कर सकते हैं। इससे पाकिस्तान के लिए बाहरी वित्तपोषण (External Financing) और मुश्किल हो सकता है।
IMF पर बढ़ेगी निर्भरता
आर्थिक जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान को अब
International Monetary Fund
से नए राहत पैकेज की जरूरत पड़ सकती है, ताकि वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रख सके।
UAE के इस सख्त फैसले ने पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और दबाव में डाल दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस संकट से कैसे निपटता है और क्या उसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से राहत मिल पाती है।
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