“UNGA 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर, ईरान, गाजा और वेस्ट बैंक के मुद्दे छाए रहे। एर्दोगन के कश्मीर बयान, अमेरिका-ईरान वार्ता और प्रतिनिधिमंडलों के वॉकआउट ने ध्यान खींचा।“
UNGA 2026 के दौरान न्यूयॉर्क में दुनिया के नेताओं के भाषणों के साथ-साथ पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक गतिविधियां भी चर्चा में हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की सामान्य बहस 22 सितंबर से शुरू हुई है और 26 सितंबर तथा 28 सितंबर तक चलेगी। इस दौरान कश्मीर, ईरान, गाजा, वेस्ट बैंक, वैश्विक सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने उद्घाटन सत्र में बहुपक्षीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता से जुड़े सवालों को रेखांकित किया। महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भी दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक दूरियों, युद्धों, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया।
कश्मीर पर एर्दोगन का बयान
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दक्षिण एशिया के विवादों का जिक्र करते हुए कश्मीर मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर समेत विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत बातचीत के जरिए संबोधित किया जाना चाहिए।
भारत का रुख इस मामले में स्पष्ट रहा है। नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबित मुद्दों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप का विरोध करता है।
UNGA के दौरान OIC के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह की बैठक भी हुई, जिसमें क्षेत्र की मानवीय, मानवाधिकार और सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की गई। भारत लंबे समय से कश्मीर पर OIC की टिप्पणियों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के तौर पर खारिज करता रहा है।
ईरान पर अमेरिका का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के UNGA भाषण में ईरान प्रमुख मुद्दों में रहा। ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया और बातचीत तथा दबाव दोनों की बात की। अमेरिकी राष्ट्रपति के भाषण में ईरान के साथ संभावित समझौते और भविष्य की बातचीत का भी उल्लेख हुआ।
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप के भाषण के बाद अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच UNGA से इतर करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई। ट्रंप ने बाद में बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया तथा आगे भी बैठक होने की बात कही।
हालांकि, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ट्रंप के भाषण के दौरान सभा से बाहर निकलकर विरोध दर्ज कराया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधियों ने ट्रंप के ईरान और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े बयानों के दौरान वॉकआउट किया।
गाजा और वेस्ट बैंक पर भी चर्चा
UNGA में गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति भी प्रमुख विषय रही। कई नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके मानवीय प्रभावों पर चिंता जताई।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अपने संबोधन में गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और पश्चिम एशिया की व्यापक स्थिति पर तीखी आलोचना की।
जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने भी पश्चिम एशिया के संघर्षों के वैश्विक प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता का असर ऊर्जा, व्यापार, निवेश और आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है।
भाषण के दौरान वॉकआउट बने विरोध का जरिया
UNGA के मंच पर इस बार कई प्रतिनिधिमंडलों के वॉकआउट भी चर्चा में रहे। ईरान के बाद क्यूबा के प्रतिनिधियों ने भी ट्रंप के भाषण के दौरान सभा से बाहर निकलकर विरोध जताया।
ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा को लेकर कड़ा बयान दिया और वहां की सरकार की आलोचना की। इसके बाद क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने वॉकआउट किया। रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप ने क्यूबा को “failed state” कहा था और द्वीप पर राजनीतिक बदलाव की बात की थी।
वॉकआउट UNGA जैसे बहुपक्षीय मंचों पर असहमति दर्ज कराने का एक दृश्य माध्यम बन गए हैं। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि वैश्विक मंच पर भाषणों के साथ-साथ देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं।
इजरायली प्रतिनिधिमंडल ने भी किया वॉकआउट
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के संबोधन के दौरान इजरायली प्रतिनिधिमंडल के वॉकआउट की भी रिपोर्ट सामने आई। एर्दोगन ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और उसकी नीतियों की आलोचना की थी।
इस घटनाक्रम ने गाजा और पश्चिम एशिया के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में मौजूद गहरे मतभेदों को फिर सामने ला दिया।
ट्रंप और मीडिया के बीच विवाद भी UNGA तक पहुंचा
UNGA के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच विवाद भी चर्चा में रहा। CNN समेत कुछ मीडिया संस्थानों को लेकर व्हाइट हाउस और अमेरिकी प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है।
ट्रंप ने UNGA में CNN की पत्रकार कैटलिन कॉलिन्स से बातचीत के दौरान उनके वहां मौजूद होने पर सवाल उठाया। कॉलिन्स ने बाद में प्रसारण में कहा कि CNN ने ट्रंप को कवर नहीं करने की बात नहीं कही थी।
इस घटनाक्रम ने अमेरिकी राष्ट्रपति और मीडिया संस्थानों के बीच जारी टकराव को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा में ला दिया।
UNGA में भाषणों के साथ पर्दे के पीछे कूटनीति
इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा की कार्यवाही में सार्वजनिक भाषणों के अलावा नेताओं और प्रतिनिधियों के बीच होने वाली द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय बैठकों पर भी खास नजर है। ईरान-अमेरिका वार्ता इसका प्रमुख उदाहरण है।
एक तरफ सार्वजनिक मंच से एक-दूसरे पर कड़े बयान सामने आए, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले रहे। इससे UNGA के दौरान औपचारिक भाषणों के साथ-साथ पर्दे के पीछे चलने वाली कूटनीति की भूमिका भी महत्वपूर्ण दिखाई देती है।
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