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यूपी सरकार ने 25 मार्च को 4 साल पूरे किए। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए जनवरी में आचार संहिता लागू होगी। जानें BJP की रणनीति, सपा-बसपा-कांग्रेस की स्थिति और चुनावी गणित।

लखनऊ | विशेष रिपोर्ट

यूपी में चुनावी साल की शुरुआत, 2027 में तय होगा सत्ता का समीकरण

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने बुधवार, 25 मार्च को अपने दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही राज्य में चुनावी साल की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।

चुनाव आयोग के संभावित कार्यक्रम के अनुसार जनवरी 2027 में आचार संहिता लागू हो सकती है, जबकि मतदान सात चरणों में कराए जाने की संभावना है। मार्च के दूसरे सप्ताह तक यह साफ हो जाएगा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करती है या फिर विपक्ष बाजी मारता है।

2022 के चुनाव का गणित

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 41.6% वोट शेयर के साथ 255 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। समाजवादी पार्टी ने 111 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई थी। वहीं, बसपा को 12.88% वोट मिलने के बावजूद केवल 1 सीट मिली थी, जबकि कांग्रेस 2 सीटों पर सिमट गई थी। सहयोगी दलों—अपना दल (एस), निषाद पार्टी और रालोद—ने भाजपा को स्थिर सरकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।

हालांकि 2017 की तुलना में भाजपा को 52 सीटों का नुकसान हुआ था, वहीं सपा ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया था।

लोकसभा चुनाव में झटका, उपचुनाव में वापसी

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में झटका लगा और पार्टी 29 सीटें हार गई। इसके बाद हुए विधानसभा उपचुनावों में भाजपा ने 9 में से 7 सीटें जीतकर वापसी के संकेत दिए। 2025 में अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर भी भाजपा ने जीत दर्ज कर सपा को मात दी।

वर्तमान विधानसभा स्थिति

उपचुनावों के बाद भाजपा और उसके सहयोगियों की संख्या बढ़कर मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। वहीं सपा के विधायकों की संख्या कुछ कम हुई है, जिसमें बगावत और निधन जैसे कारण शामिल हैं।

चुनावी रणनीति और चुनौतियां

चुनावी साल में भाजपा सरकार संगठन और शासन के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री लगातार जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं का लोकार्पण कर रहे हैं।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस के सामने भाजपा को चुनौती देने के लिए मजबूत रणनीति बनाने की चुनौती है। खासकर गठबंधन और वोट ट्रांसफर का गणित आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

आगे की राह

राज्य का राजनीतिक भविष्य अब अगले एक वर्ष में होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा। विकास, कानून-व्यवस्था, जातीय समीकरण और गठबंधन—ये सभी कारक 2027 के चुनाव में अहम साबित होंगे।

अब देखना यह होगा कि यूपी की जनता विकास और स्थिरता के नाम पर भाजपा को फिर मौका देती है या बदलाव के पक्ष में मतदान करती है।

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