“उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक पुनर्गठन की तैयारी में जुटी है। मार्च में चार जिला अध्यक्ष और छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा हो सकती है। सपा के PDA फार्मूले को काउंटर करने के लिए जातीय समीकरण, खासकर काशी क्षेत्र का गणित अहम माना जा रहा है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल के बीच भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। मार्च महीने में पार्टी चार संगठनात्मक जिलों में जिला अध्यक्ष और छह क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा कर सकती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन नियुक्तियों में जातीय संतुलन को खास महत्व दिया जा रहा है ताकि विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण को राजनीतिक तौर पर चुनौती दी जा सके।
काशी क्षेत्र के जातीय गणित पर टिकी नजर
पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा काशी क्षेत्र को लेकर है। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली माना जाता है और यहां के जातीय समीकरण से अन्य क्षेत्रों की रणनीति भी तय हो सकती है।
फिलहाल काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल हैं, जो कुर्मी समाज से आते हैं। वहीं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी ओबीसी समुदाय से हैं। ऐसे में इस बार नए सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए यहां बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
ओबीसी और अनुसूचित समाज को मिल सकता है प्रतिनिधित्व
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में से दो ओबीसी और एक अनुसूचित समाज से चेहरे को मौका देने की चर्चा है। इससे भाजपा व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश देना चाहती है।
कई क्षेत्रों में बदले जा सकते हैं चेहरे
- गोरखपुर क्षेत्र में वर्तमान अध्यक्ष सहजानंद राय हैं। यहां चयन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति को भी अहम माना जा रहा है।
- कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में राम प्रकाश पाल अध्यक्ष हैं, जहां अंदरूनी कलह के चलते जातीय समीकरण बदलने की चर्चा है।
- ब्रज क्षेत्र में दुर्गविजय शाक्य अध्यक्ष हैं। यहां शाक्य और लोध समाज का प्रभाव माना जाता है और इस बार लोध समाज से चेहरे को मौका मिल सकता है।
- अवध क्षेत्र में युवा चेहरा कमलेश मिश्रा अध्यक्ष हैं, लेकिन इस बार क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधित्व की चर्चा भी चल रही है।
भाजपा का दावा: सर्वसमाज को साथ लेकर चलेंगे
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का कहना है कि भाजपा हमेशा सर्वसमाज के साथ और सबका सम्मान करने की नीति पर चलती है। संगठन में भी सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा का यह संगठनात्मक पुनर्गठन सामाजिक समीकरणों को साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
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