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“UP Cabinet Decision: मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 31 में से 30 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में मालिकाना जांच अनिवार्य, और मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के तहत गांवों तक बस सेवा शुरू होगी।”

लखनऊ। Yogi Adityanath की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई, जबकि प्रस्ताव संख्या-3 को फिलहाल होल्ड कर दिया गया है। बैठक के बाद हुई प्रेसवार्ता में सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी गई, जिनमें संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े फैसले प्रमुख रहे।

स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग में सख्त व्यवस्था

कैबिनेट ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। अब प्रदेश में किसी भी संपत्ति के रजिस्ट्रेशन से पहले उसके वास्तविक मालिक की पहचान और स्वामित्व की पुष्टि खतौनी के आधार पर की जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति उसका वास्तविक मालिक है या नहीं। इसके लिए राजस्व अभिलेखों और खतौनी का मिलान किया जाएगा। बिना मालिकाना हक की जांच किए अब संपत्ति का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति की बिक्री, धोखाधड़ी और विवादों पर रोक लगेगी। साथ ही जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

इसके अलावा कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के समय स्टाम्प शुल्क सर्किल रेट के आधार पर ही लिया जाएगा। वहीं नगर निगम क्षेत्र के अंदर संपत्ति के पंजीकरण पर दो प्रतिशत विकास शुल्क अलग से लिया जाएगा। इस राशि का उपयोग शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है।

प्रदेश में कुल लगभग 59,163 ग्राम सभाएं हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के माध्यम से अधिक से अधिक गांवों को बस सेवा से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीणों को जिला मुख्यालय और अन्य शहरों तक पहुंचने में सुविधा हो।

योजना के तहत बसों के संचालन के लिए निजी वाहनों को अनुबंध के आधार पर शामिल किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सेवा शुरू करने में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनेगी समिति

इस योजना के प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। इस समिति में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे।

यही समिति बसों के संचालन, मार्ग निर्धारण, किराया तय करने और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी। किराया सरकार के नियमों और जिला स्तरीय समिति के निर्णय के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

रात में गांवों में रुकेंगी बसें

योजना के तहत बसों का संचालन इस तरह किया जाएगा कि वे रात में गांवों में रुकें और सुबह करीब दस बजे तक जिला मुख्यालय पहुंच जाएं। इससे ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, सरकारी कार्यालयों और अन्य जरूरी कामों के लिए शहर आने-जाने में सुविधा मिलेगी।

बस मालिकों को यह भी छूट दी जाएगी कि वे अपने ड्राइवर और कंडक्टर स्वयं नियुक्त कर सकें। हालांकि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है, ताकि गांवों में रात में बसों के ठहराव और संचालन में किसी तरह की दिक्कत न हो।

परिवहन विभाग नहीं लेगा टैक्स

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत अनुबंधित बसों पर परिवहन विभाग की ओर से कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि टैक्स में छूट देने से निजी ऑपरेटर ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा शुरू करने के लिए आगे आएंगे।

सरकार का कहना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर होगी और लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के अवसरों तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही गांवों और शहरों के बीच संपर्क मजबूत होगा, जिससे प्रदेश के समग्र विकास को गति मिलेगी।

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लखनऊ से स्टेट हेड संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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