“उत्तर प्रदेश में गोशालाओं को सर्कुलर इकोनॉमी से जोड़ने के लिए FAO India, पशुधन विभाग और DUVASU मथुरा के बीच MoU होगा। गोबर से बायोगैस, AI आधारित रोग निगरानी और चारा विकास पर जोर।“
हाइलाइट्स:
- गोशालाओं को सर्कुलर अर्थव्यवस्था से जोड़ने की तैयारी
- FAO India, पशुधन विभाग और दुवासु मथुरा के बीच MoU
- गोबर से बायोगैस और बायो-CNG उत्पादन पर फोकस
- AI आधारित पशु रोग निगरानी प्रणाली विकसित होगी
- मथुरा और गोरखपुर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश की गोशालाओं को सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए पशुधन विभाग, FAO India और दुवासु मथुरा के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया जाएगा।
यह पहल नीतिगत समर्थन, अनुसंधान और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन को एक साथ जोड़ने का प्रयास है, जिससे गोशालाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।
सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पर जोर
बैठक में चार प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति बनी—
- हरा चारा मूल्य श्रृंखला का विकास
- गोबर व कृषि अवशेषों से कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) और बायो-सीएनजी उत्पादन
- ‘वन हेल्थ’ आधारित पशु रोग निगरानी प्रणाली
- संसाधनों के एकीकृत उपयोग का मॉडल तैयार करना
इस पहल के तहत गोशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ऊर्जा और जैव संसाधनों के उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
एआई और फार्माकोविजिलेंस का उपयोग
पशु रोग निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम मेधा (AI) और फार्माकोविजिलेंस तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे पशुओं में रोगों की समय रहते पहचान और नियंत्रण संभव होगा।
मथुरा और गोरखपुर से होगी शुरुआत
परियोजना की शुरुआत मथुरा और गोरखपुर की गोशालाओं से की जाएगी। यहां विकसित मॉडल को बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
संस्थाओं की भूमिका
- FAO India: ज्ञान साझेदार के रूप में वैश्विक विशेषज्ञता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा
- दुवासु मथुरा: जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और समन्वय करेगा
- पशुधन विभाग: नीति निर्माण और कार्यान्वयन की निगरानी करेगा
बैठक में एफएओ इंडिया के प्रमुख ताकायुकी हागीवारा, दुवासु के कुलपति डॉ. अभिजित मित्र और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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