“उत्तर प्रदेश के बिजनौर से तेंदुओं की नसबंदी अभियान की शुरुआत होगी। उत्तर प्रदेश सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए Leopard Sterilization Plan लागू कर रही है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रही तेंदुओं की संख्या को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वन विभाग अब तेंदुओं की नसबंदी (Leopard Sterilization) का अभियान शुरू करने की तैयारी में है, जिसकी शुरुआत बिजनौर जिले से की जाएगी।
प्रदेश के कई जिलों में तेंदुओं के हमले और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खासकर गन्ने के खेतों वाले इलाकों में तेंदुओं की मौजूदगी से ग्रामीणों में डर का माहौल है। ऐसे में सरकार ने अब प्रजनन दर नियंत्रित कर इनकी संख्या सीमित करने का प्लान बनाया है।
महाराष्ट्र मॉडल पर आधारित योजना
यह अभियान महाराष्ट्र में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर लागू किया जाएगा, जहां सीमित संख्या में तेंदुओं की नसबंदी का ट्रायल किया गया है। यूपी में भी पहले ट्रायल किया जाएगा और सफल होने पर इसे बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।
आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मादा तेंदुओं के लिए ‘इम्यूनो-कॉन्ट्रासेप्शन’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित किए बिना प्रजनन रोका जा सके।
तेंदुओं को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाएगी और फिर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया जाएगा।
बढ़ती संख्या बनी चुनौती
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में तेंदुओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। जहां पहले इनकी संख्या सीमित थी, वहीं अब यह कई जिलों में फैल चुके हैं।
देशभर में तेंदुओं की कुल संख्या 13,000 से ज्यादा है, जबकि यूपी में यह संख्या 275 तक पहुंच चुकी है।
मानव-तेंदुआ संघर्ष कम करने पर फोकस
पिछले एक साल में बिजनौर, बहराइच, लखीमपुर और सीतापुर जैसे जिलों में तेंदुओं के हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।
सरकार का मानना है कि नसबंदी के जरिए इनकी आबादी नियंत्रित कर इस संघर्ष को कम किया जा सकता है।
भविष्य की योजना
वन विभाग गोंडा और इटावा में लेपर्ड सफारी विकसित करने की भी योजना बना रहा है, जहां पकड़े गए तेंदुओं को रखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों की टीम लैप्रोस्कोपिक तकनीक से नसबंदी करेगी और पांच साल में 75% तक नियंत्रण का लक्ष्य रखा गया है।
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