“पश्चिम एशिया संकट सर्वदलीय बैठक: सरकार ने आज संसद परिसर में बैठक बुलाई, राजनाथ सिंह करेंगे अध्यक्षता। जानिए भारत की रणनीति।“
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर केंद्र सरकार आज सर्वदलीय बैठक बुला रही है। संसद परिसर में शाम 5 बजे होने वाली इस अहम बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर राजनीतिक दलों के नेताओं को क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात और भारत के कूटनीतिक रुख की जानकारी देंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए हालिया बयानों के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने इस स्थिति को “अभूतपूर्व संकट” बताया था।
क्यों अहम है यह बैठक?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक स्तर पर कई असर देखने को मिल रहे हैं:
- अहम समुद्री व्यापार मार्ग, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रभावित
- ऊर्जा आपूर्ति और तेल-गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- सप्लाई चेन पर दबाव और महंगाई की आशंका
- खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा चिंता
इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहती है।
विपक्ष का रुख क्या है?
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं।
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिर्फ ब्रीफिंग के बजाय पूर्ण बहस की जरूरत बताई
- राहुल गांधी ने विदेश नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए
हालांकि, सर्वदलीय बैठक बुलाने के फैसले का स्वागत भी किया गया है, भले ही कुछ नेता इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे।
पहले भी हुई हाई-लेवल बैठक
इस बैठक से एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख समीर कामत जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
क्या है सरकार की रणनीति?
सरकार इस बैठक के जरिए:
- विपक्ष को हालात की जानकारी देना
- राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करना
- एक साझा राजनीतिक सहमति बनाना चाहती है, ताकि इस वैश्विक संकट से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।
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