“संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जानिए पूरा मामला, कोर्ट का आदेश और कानूनी प्रक्रिया।”
हाइलाइट्स :
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ FIR पर रोक लगाई
- संभल के CJM ने 12 पुलिसकर्मियों पर FIR के दिए थे आदेश
- याचिकाकर्ता ने बेटे को गोली मारने का लगाया था आरोप
- हाईकोर्ट ने पांच हफ्ते बाद अगली सुनवाई तय की
- संभल जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़ा है पूरा मामला
प्रयागराज। संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एएसपी अनुज चौधरी को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। यह रोक संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा दिए गए उस आदेश पर लगाई गई है, जिसमें अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
मंगलवार को जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद की जाएगी।
क्या था लोअर कोर्ट का आदेश?
संभल के नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन ने 6 फरवरी 2025 को CJM कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि—
- उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने निकला था
- शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पुलिस ने उसे गोली मार दी
- इस घटना के लिए तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए 9 जनवरी 2026 को CJM विभांशु सुधीर ने सभी आरोपित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट तक मामला कैसे पहुंचा?
CJM के आदेश के खिलाफ उस समय फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी ने 29 जनवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी पुलिस अधिकारी के समर्थन में याचिका दाखिल की।
सोमवार को इस मामले पर करीब दो घंटे तक विस्तृत बहस हुई। मंगलवार को हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखते हुए अंततः FIR पर रोक लगा दी।







