“फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे। पीएम मोदी के साथ रक्षा, AI, इंडो-पैसिफिक और होराइजन 2047 रोडमैप पर अहम बैठक करेंगे। जानें भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की पूरी रिपोर्ट।“
हाइलाइट्स:
- फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे
- पीएम मोदी से द्विपक्षीय बैठक और ‘ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ लॉन्च
- रक्षा, स्पेस, AI और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर चर्चा
- भारत मंडपम में AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भागीदारी
मुंबई। वैश्विक जियो-पॉलिटिक्स के बदलते परिदृश्य के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने चौथे भारत दौरे पर मंगलवार को मुंबई पहुंचे। उनके साथ फर्स्ट लेडी ब्रिगिट मैक्रों भी मौजूद हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह दौरा 19 फरवरी तक प्रस्तावित है और इसे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी से होगी उच्चस्तरीय वार्ता
राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री Narendra Modi के निमंत्रण पर भारत आए हैं। दोनों नेता मुंबई में ‘होराइजन 2047’ रोडमैप के तहत व्यापक चर्चा करेंगे।
बैठक के प्रमुख मुद्दे:
- रक्षा सहयोग
- इंडो-पैसिफिक रणनीति
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- स्पेस और न्यूक्लियर एनर्जी
- क्लाइमेट एक्शन
दोनों देश 2026 को “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन” के रूप में लॉन्च करेंगे।
AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भागीदारी
मुंबई कार्यक्रम के बाद प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा, जहां India AI Impact Summit 2026 का आयोजन Bharat Mandapam में 16 से 20 फरवरी तक किया जा रहा है।
यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला प्रमुख वैश्विक AI समिट है, जिसका थीम है:
People, Planet, Progress
यह पहल फरवरी 2025 में पेरिस में आयोजित AI Action Summit के बाद दोनों देशों की टेक्नोलॉजी साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकेत देती है।
पहले भी मजबूत रहे हैं संबंध
- 2018: मैक्रों का पहला भारत दौरा
- 2023: G20 Summit 2023 में भागीदारी
- 2024: 75वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, राफेल डील, अंतरिक्ष मिशन और परमाणु ऊर्जा सहयोग पहले से ही मजबूत रहे हैं। वर्तमान दौरा इस साझेदारी को नई रणनीतिक दिशा देगा।
बदलती वैश्विक भू-राजनीति और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मैक्रों का यह भारत दौरा दोनों देशों के बीच सामरिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगा। AI, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
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