"यूपी एक्सप्रेसवे टोल वृद्धि 2026: उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने आगरा-लखनऊ, उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर टोल रेट जारी किया। नई रेटेड सूची, वाहन शुल्क और संपूर्ण अपडेट जानें।"
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए अब सफर महंगा हो गया है। UP Expressway Toll Hike के तहत 1 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि से Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority ने राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में बढ़ोतरी लागू कर दी है।
इस फैसले के बाद Agra-Lucknow Expressway, Purvanchal Expressway, Bundelkhand Expressway और Gorakhpur Link Expressway पर सफर करने वाले यात्रियों को अब पहले से अधिक टोल देना पड़ेगा।
वाहन श्रेणी के अनुसार बढ़ी दरें
यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार, टोल दरों में सभी श्रेणियों के वाहनों पर वृद्धि की गई है—
- दोपहिया, तीन पहिया और ट्रैक्टर: प्रति फेरा ₹5 की बढ़ोतरी
- कार, जीप और वैन: लगभग ₹10 की वृद्धि
- हल्के व्यावसायिक वाहन: करीब ₹20 तक बढ़ोतरी
- बस और ट्रक: ₹15 से ₹50 तक वृद्धि
- भारी वाहन (तीन से सात चक्का): ₹65 से ₹85 तक बढ़ोतरी
सबसे अधिक बढ़ोतरी Agra-Lucknow Expressway पर देखने को मिली है, जहां भारी वाहनों पर ₹85 तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
नई टोल दरों की झलक (प्रति फेरा)
नई दरों के अनुसार—
- कार/जीप: ₹675 (आगरा-लखनऊ), ₹700 (पूर्वांचल)
- बस/ट्रक: ₹2150 तक
- भारी वाहन: ₹4230 तक
इन दरों के लागू होने से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों और लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों के खर्च में सीधा इजाफा होगा।
आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर असर
टोल दरों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई महंगी हो सकती है और इसका असर बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
क्यों बढ़ाई गईं टोल दरें?
Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के रखरखाव, संचालन लागत और बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए यह बढ़ोतरी की गई है। समय-समय पर टोल दरों में संशोधन किया जाना एक सामान्य प्रक्रिया है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि टोल दरों में वृद्धि से राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, इससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, यह फैसला जहां विकास और रखरखाव के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है, वहीं आम यात्रियों के लिए यह बढ़ती महंगाई के बीच एक और आर्थिक दबाव बनकर सामने आया है।
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