“चीन हमसे कई गुना शक्तिशाली”, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का बयान चर्चा में

सैन्य और आर्थिक ताकत में चीन को बताया आगे; भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को स्वीकारने की दी सलाह

“पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि चीन सैन्य और आर्थिक रूप से भारत से कई गुना शक्तिशाली है। सलमान खुर्शीद से बातचीत में उन्होंने नई रणनीति अपनाने की जरूरत बताई।”

नई दिल्ली। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति Hamid Ansari का चीन को लेकर दिया गया बयान शनिवार को चर्चा का केंद्र बन गया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की तुलना में चीन सैन्य और आर्थिक दोनों ही मामलों में भारत से कई गुना अधिक शक्तिशाली है और इस सच्चाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह टिप्पणी उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री Salman Khurshid के साथ बातचीत के दौरान की। अंसारी ने स्पष्ट कहा कि भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को समझना जरूरी है और चीन जैसे बड़े पड़ोसी को कमतर आंकना भारत के हित में नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि चीन न केवल क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से बड़ा देश है, बल्कि वह आर्थिक और सैन्य दृष्टि से भी काफी विकसित और मजबूत स्थिति में है। ऐसे में भारत को उसके साथ संबंधों को लेकर नई रणनीति और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

अंसारी ने यह भी कहा कि चीन भारत का पड़ोसी देश है और उसके प्रभाव को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को इस चुनौती का सामना करने के लिए अलग सोच और संतुलित कूटनीति अपनानी होगी।

कूटनीतिक अनुभव का लंबा सफर
हामिद अंसारी का कूटनीतिक करियर बेहद समृद्ध रहा है। उन्होंने 1961 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल होकर बगदाद, रबात, जेद्दा और ब्रुसेल्स जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा वे संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, ईरान और सऊदी अरब में राजदूत रह चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

सलमान खुर्शीद का राजनीतिक परिचय
वहीं Salman Khurshid देश के जाने-माने नेता, वरिष्ठ अधिवक्ता और लेखक हैं। वे केंद्र सरकार में विदेश मंत्री रह चुके हैं और कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंसारी का यह बयान भारत-चीन संबंधों को लेकर एक यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो आने वाले समय में रणनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

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