योगी आदित्यनाथ ने 7000 परिवारों को दिया भू-स्वामित्व अधिकार

थारू जनजाति और विस्थापित हिंदू परिवारों को मिला दशकों का अधिकार, ₹1234 करोड़ की परियोजनाओं का भी लोकार्पण

लखीमपुर खीरी खबर: सीएम योगी आदित्यनाथ ने 7000 परिवारों को भू-स्वामित्व अधिकार दिए। थारू जनजाति और बांग्लादेशी विस्थापित हिंदुओं को मिला सम्मान, ₹1234 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ।

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के Lakhimpur Kheri में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए करीब 7,000 परिवारों को भू-स्वामित्व अधिकार प्रदान किए। यह कदम न केवल प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि दशकों से अधिकार और पहचान से वंचित लोगों को सम्मान देने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

7000 परिवारों को मिला मालिकाना हक

कार्यक्रम के तहत थारू जनजाति के 4,356 परिवारों और नदियों के कटान से प्रभावित 2,350 परिवारों को जमीन का स्वामित्व दिया गया। इसके अलावा, मोहम्मदी क्षेत्र में बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को भी भू-अधिकार पत्र सौंपे गए।

कुल मिलाकर लगभग 7,000 परिवारों, यानी करीब 35,000 लोगों को इसका सीधा लाभ मिला।

₹1234 करोड़ की विकास परियोजनाएं

इस मौके पर विकास को भी नई गति देते हुए कुल ₹1234 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।

  • ₹817 करोड़ की 314 परियोजनाएं पलिया, निघासन, गोला गोकर्णनाथ और श्रीनगर क्षेत्रों में
  • ₹417 करोड़ की 213 परियोजनाएं मोहम्मदी, लखीमपुर और धौरहरा क्षेत्रों में

इन परियोजनाओं में सड़क, बुनियादी ढांचा और जनसुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं।

थारू जनजाति को मिला पीढ़ियों का अधिकार

थारू जनजाति लंबे समय से अपनी ही जमीन पर अधिकार के लिए संघर्ष कर रही थी। कई पीढ़ियां बीत जाने के बावजूद उन्हें मालिकाना हक नहीं मिल पाया था। इस फैसले के बाद अब उन्हें न केवल जमीन का अधिकार मिला, बल्कि सामाजिक सम्मान भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इसे “अधिकार से आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता से आत्मसम्मान” की यात्रा बताया।

विस्थापित हिंदू परिवारों को भी राहत

बांग्लादेश से आए विस्थापित हिंदू परिवार वर्षों से अस्थायी जीवन जी रहे थे। अब उन्हें स्थायी पहचान और जमीन का अधिकार मिलना उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का नया अध्याय खोल रहा है।

नीति और इच्छाशक्ति का परिणाम

सरकार का कहना है कि यह कदम स्पष्ट नीति और मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है। नागरिकता और पुनर्वास से जुड़े कानूनों और योजनाओं के माध्यम से ऐसे परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

अन्य राज्यों के लिए मॉडल

विशेषज्ञों का मानना है कि लखीमपुर खीरी में लागू यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है, जहां विकास के साथ-साथ अधिकार और सम्मान को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

विकास का नया संतुलन

यह पहल दिखाती है कि विकास केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक न्याय, पहचान और समान अवसर भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में यह संतुलित विकास मॉडल अब व्यापक चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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