केजीएमयू परिसर में अवैध मजारों पर कार्रवाई शुरू, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन सख्त

निरीक्षण में 8 अवैध मजारें चिन्हित, मरीजों की आवाजाही और महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का दिया हवाला

लखनऊ के KGMU परिसर में 8 अवैध मजारें चिन्हित होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नोटिस जारी कर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) प्रशासन ने परिसर में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में मौजूद 8 अवैध मजारों को चिन्हित करते हुए उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख विज्ञान संकाय द्वारा जारी पत्र में बताया गया कि परिसर के व्यापक निरीक्षण के दौरान ‘शाहमीना साहब की दरगाह’ और ‘हसनैन साहब की मजार’ के अतिरिक्त 6 अन्य मजारें पाई गईं। प्रशासन का कहना है कि इन निर्माणों में इस्तेमाल की गई ईंट, टाइल्स और अन्य सामग्री से यह प्रतीत होता है कि इनका निर्माण हाल के वर्षों में किया गया है।

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण कराया गया था, ताकि महिला चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ये मजारें मरीजों के आवागमन मार्ग में स्थित हैं, जिससे विशेषकर गंभीर मरीजों के आने-जाने में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर ऐसी गतिविधियां भी देखी गईं, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं माना गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट पिटीशन सिविल संख्या 295/2022 ‘इन री: डायरेक्शन्स इन द मैटर ऑफ डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स’ में जारी दिशा-निर्देशों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में 22 जनवरी 2026 को संबंधित मजारों के संभावित संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस की प्रतियां संबंधित स्थलों पर चस्पा कराने के साथ ही ई-मेल और हार्ड कॉपी के माध्यम से जिलाधिकारी लखनऊ को भी भेजी गई थीं।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी केके सिंह के अनुसार, पांच मजारों के संबंध में कोई भी व्यक्ति या प्रतिनिधि जवाब देने के लिए सामने नहीं आया। केवल एक मजार की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से जवाब प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसमें किसी समिति या अधिकृत संचालक का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया।

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक भावना को आहत करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अस्पताल परिसर में मरीजों की निर्बाध आवाजाही और सभी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई कानूनी राय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही की जाएगी।

विश्वविद्यालय अब अवैध अतिक्रमण हटाने की दिशा में अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटा है।

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