73 विपक्षी सांसदों का बड़ा कदम, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का आरोप—‘सिद्ध कदाचार’; महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की पहल

CEC Removal News: कांग्रेस समेत 73 विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए राष्ट्रपति को नोटिस दिया। जानें महाभियोग प्रक्रिया, आरोप और राजनीतिक असर।

नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस समेत 73 विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के माध्यम से राष्ट्रपति को नोटिस सौंपकर उन्हें पद से हटाने की मांग की है।

महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की पहल

जयराम रमेश ने जानकारी दी कि विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।

इससे पहले भी इसी तरह का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह पारित नहीं हो सका था।

‘सिद्ध कदाचार’ के लगाए गए आरोप

नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर ‘सिद्ध कदाचार’ के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि ये आरोप 15 मार्च 2026 के बाद किए गए कार्यों और निर्णयों से जुड़े हैं।

जयराम रमेश के अनुसार, सीईसी के खिलाफ नौ विशिष्ट आरोप हैं, जिन्हें विस्तार से दस्तावेजों में दर्ज किया गया है।

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

विपक्ष ने अपनी मांग में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) का हवाला दिया है। इन प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है।

इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

विपक्षी दलों ने हाल के वर्षों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आयोग के कुछ फैसले सत्तारूढ़ दल के पक्ष में झुके हुए प्रतीत होते हैं और पारदर्शिता की कमी है।

आगे क्या होगा?

अब यह फैसला राष्ट्रपति के स्तर पर होगा कि इस नोटिस को स्वीकार किया जाता है या नहीं। यदि स्वीकार किया जाता है, तो संसद में महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जिसमें जांच और बहस के बाद मतदान होगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक गलियारों में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा असर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ सकता है।

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