CM योगी ने लेखा परीक्षकों को दिए नियुक्ति पत्र, 2017 से पहले की बदहाल स्थिति पर साधा निशाना

योगी आदित्यनाथ ने नव चयनित लेखा परीक्षकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर दिया जोर

CM Yogi Adityanath ने Lucknow में 500 लेखा परीक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटे। बोले- 2017 से पहले बदहाल यूपी अब ‘Revenue Surplus State’ बना, वित्तीय अनुशासन से बदली तस्वीर।

लोक भवन में आयोजित हुआ नियुक्ति पत्र वितरण समारोह

लखनऊ स्थित लोक भवन में सोमवार को सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के नव चयनित लेखा परीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 500 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे और उन्हें ईमानदारी से दायित्व निभाने का संदेश दिया।

“2017 से पहले और अब के यूपी में बड़ा अंतर”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की छवि बदहाल थी, लेकिन अब प्रदेश ने हर क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए कानून-व्यवस्था के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बेहद जरूरी होता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वित्तीय अनुशासन नहीं होता, तो उत्तर प्रदेश ‘बीमारू राज्य’ की छवि से बाहर नहीं निकल पाता।

“आज यूपी बना रेवेन्यू सरप्लस स्टेट”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता के चलते उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बिना कर्ज लिए योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना

सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि लखनऊ का जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर इसका उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना की शुरुआती लागत 200 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 860 करोड़ रुपये हो गई, इसके बावजूद परियोजना अधूरी रही। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन की कमी का परिणाम बताया।

गंगा एक्सप्रेसवे सहित बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उल्लेख करते हुए गंगा एक्सप्रेसवे का उदाहरण दिया।

उन्होंने बताया कि लगभग 600 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। इसके साथ ही 9 इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर कुल मिलाकर करीब 42 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है।

“अब बैंक खुद निवेश के लिए आगे आते हैं”

सीएम योगी ने कहा कि पहले प्रदेश की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि कोई बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं होता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बैंक खुद निवेश की पेशकश कर रहे हैं, जो राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले परीक्षाओं में पेपर लीक आम बात थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि आज चयनित युवाओं के बारे में किसी मंत्री को भी पहले से जानकारी नहीं होती, जो पारदर्शिता का प्रमाण है।

बेटियों की भागीदारी पर विशेष जोर

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चयनित बेटियों का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह बदलाव का संकेत है।

उन्होंने कहा कि बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है।

पारदर्शिता और अनुशासन पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री के संबोधन से साफ संकेत मिला कि राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दे रही है।

नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम न केवल युवाओं के लिए रोजगार का अवसर है, बल्कि यह सरकार के उस दावे को भी मजबूत करता है कि उत्तर प्रदेश अब नई आर्थिक और प्रशासनिक दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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