“UP-Haryana Border Dispute: 52 साल पुराने सीमा विवाद को खत्म करने के लिए बागपत में 11.14 करोड़ रुपये से बाउंड्री पिलर लगाए जाएंगे। Survey of India की निगरानी में यमुना खादर में सीमांकन कार्य शुरू होगा।“
बागपत। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच पिछले 52 वर्षों से चला आ रहा सीमा विवाद अब समाप्त होने की ओर बढ़ रहा है। शासन ने यमुना खादर क्षेत्र में बाउंड्री पिलर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 11.14 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, जिसके तहत अब टेंडर भी जारी कर दिया गया है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही चयनित ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर काम शुरू होने की संभावना है।
Survey of India की निगरानी में होगा काम
सीमा निर्धारण का कार्य Survey of India के अधिकारियों की निगरानी में किया जाएगा। दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है कि सर्वे के आधार पर सम-विषम क्रम में बाउंड्री पिलर लगाए जाएंगे।
हरियाणा की ओर से पहले ही पिलर लगाए जा चुके हैं, जबकि बजट के अभाव में उत्तर प्रदेश की तरफ काम लंबित था, जो अब शुरू होने जा रहा है।
4,500 हेक्टेयर जमीन का विवाद सुलझेगा
इस सीमा विवाद में बागपत के 27 गांव और हरियाणा के सोनीपत-पानीपत के 22 गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर करीब 4,500 हेक्टेयर जमीन लंबे समय से विवाद में फंसी हुई है।
इसमें बागपत की लगभग 2,850 हेक्टेयर और हरियाणा की 1,750 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस विवाद के कारण दोनों राज्यों के किसानों के बीच कई बार तनाव और हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं।
टेंडर प्रक्रिया पूरी, जल्द शुरू होगा कार्य
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सात ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था। सबसे कम बोली लगाने वाली फर्म को काम सौंपा गया है।
PWD के एक्सईएन अतुल कुमार ने पुष्टि की है कि जल्द ही वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा और इसके बाद यमुना खादर में पिलर लगाने का काम शुरू हो जाएगा।
स्थायी समाधान की उम्मीद
सीमा पर बाउंड्री पिलर लगने के बाद वर्षों से चले आ रहे इस विवाद के स्थायी समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि स्पष्ट सीमा निर्धारण से भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद और टकराव की स्थिति नहीं बनेगी।
यूपी-हरियाणा सीमा विवाद को खत्म करने की यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बल्कि इससे हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद भी है। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे के समाधान से क्षेत्र में शांति और स्थिरता आने की संभावना है।
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