“Lucknow News: एसजीपीजीआई लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस सप्ताह के तहत भव्य अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग वेबिनार आयोजित किया गया। भारत और UAE के विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित नर्सिंग, रोगी सुरक्षा और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।“
लखनऊ। एसजीपीजीआई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस सप्ताह समारोह के अंतर्गत 9 मई 2026 को टेलीमेडिसिन सभागार में भव्य अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। यह वेबिनार नर्सिंग उत्कृष्टता, उन्नत नर्सिंग देखभाल, साक्ष्य-आधारित अभ्यास (एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस), रोगी सुरक्षा और नर्सों के सशक्तिकरण को समर्पित वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों की श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण रहा।

इस आयोजन में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित विभिन्न स्थानों से नर्सिंग विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। वेबिनार का उद्देश्य नर्सिंग समुदाय को नवीनतम शोध, वैज्ञानिक तकनीकों और रोगी देखभाल के आधुनिक तरीकों से अवगत कराना था।
स्वागत संबोधन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ नीलम श्रीवास्तव असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट), एंसी जयराज (डिप्टी नर्सिंग सुपरिटेंडेंट) और नीमा पंत (असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट) के स्वागत संबोधन से हुआ।

उन्होंने नर्सिंग पेशे की बदलती भूमिका, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सों के बढ़ते महत्व और शोध-आधारित चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वेबिनार के विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों का संचालन मंजू सिंह (मुख्य नर्सिंग ऑफिसर),अलका मोहन (डीएनएस), अनीता वाल्टर (डीएनएस), ज्योतिबाला (एएनएस) सहित कई वरिष्ठ नर्सिंग विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
साक्ष्य-आधारित नर्सिंग पद्धतियों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान
वेबिनार में पश्चिम बंगाल के बर्दवान मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. उमा रानी अधिकारी ने साक्ष्य-आधारित नर्सिंग पद्धतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक शोध और प्रमाणित चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने से रोगियों को बेहतर उपचार और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।
मेरठ स्थित एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. बालमोनी बोस ने रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में नर्सों की भूमिका केवल देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उपचार प्रक्रिया की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ओडिशा के बरहामपुर मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. राजलक्ष्मी मिश्रा ने साक्ष्य-आधारित नैदानिक नर्सिंग पद्धतियों पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शोध आधारित नर्सिंग अभ्यास रोगियों के उपचार परिणामों को बेहतर बनाता है और चिकित्सा त्रुटियों को कम करने में मदद करता है।

शोध आधारित रोगी देखभाल पर विशेष चर्चा
एसजीपीजीआई कॉलेज ऑफ नर्सिंग की सबाना खातून ने शोध को रोगी देखभाल में लागू करने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नर्सिंग शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक विकास नहीं बल्कि रोगियों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना भी है।
कोलकाता स्थित नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की प्रोफेसर डॉ. शम्पा गुप्ता ने अंतःशिरा दर्द प्रबंधन में साक्ष्य-आधारित तरीकों पर जानकारी दी। उन्होंने दर्द प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों और रोगियों को कम पीड़ा के साथ उपचार देने की पद्धतियों पर प्रकाश डाला।
कटक मेडिकल कॉलेज, ओडिशा की डॉ. अंजना बाला बेहुरा ने साक्ष्य-आधारित नर्सिंग पद्धतियों को लागू करने में आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि संसाधनों की कमी, प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान की सीमाओं के बावजूद नर्सिंग समुदाय लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में कार्य कर रहा है।
संक्रमण रोकथाम और गहन चिकित्सा नर्सिंग पर विशेष सत्र
वैज्ञानिक चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए कोलकाता के ईएसआई जोका संस्थान की निबेदिता डे ने प्रसूति एवं प्रसव कक्षों में संक्रमण रोकथाम के साक्ष्य-आधारित उपायों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में संक्रमण नियंत्रण की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया।
यूएई से शामिल हुईं अंतर्राष्ट्रीय अतिथि वक्ता शेरोन शीबा थंबिथुराई ने गहन चिकित्सा नर्सिंग (क्रिटिकल केयर नर्सिंग) में साक्ष्य-आधारित अभ्यास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने आईसीयू में कार्यरत नर्सों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
पश्चिम बंगाल के आलिया विश्वविद्यालय की डॉ. उषा मल्लिक ने नवजात शिशु नर्सिंग देखभाल में वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं मीरा प्रजापति ने सर्जिकल साइट संक्रमण की रोकथाम और ऑपरेशन थिएटर प्रथाओं में नर्सिंग की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संक्रमण रोकथाम के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
देश-विदेश से करीब 200 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
वेबिनार में भारत और विदेश से लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें नर्सिंग छात्र, शिक्षक, शोधकर्ता, क्लीनिकल नर्सिंग विशेषज्ञ और स्वास्थ्य पेशेवर शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को नवीनतम शोध, वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक नर्सिंग अभ्यासों की जानकारी प्राप्त हुई। इससे न केवल उनके ज्ञान में वृद्धि हुई बल्कि उन्हें रोगी देखभाल की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रेरणा भी मिली।
जुइन दत्ता घोष ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम का समापन जुइन दत्ता घोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, आयोजकों, मॉडरेटरों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के आयोजन नर्सिंग समुदाय के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित होते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में उनके विशेष योगदान के लिए नर्सिंग प्रशासन द्वारा सुश्री जुइन दत्ता घोष को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अभिषेक नाहर और कनिका जैनथ ने कुशलतापूर्वक किया।
नर्सिंग शिक्षा और शोध को नई दिशा
अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग वेबिनार का सफल आयोजन नर्सिंग शिक्षा, अनुसंधान, रोगी सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित नैदानिक प्रथाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि एसजीपीजीआई न केवल उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि नर्सिंग शिक्षा, शोध और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
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