PDA की काट बने सुरेंद्र दिलेर, पश्चिमी यूपी में दलित वोट बैंक साधने की तैयारी

राजनीति की तीसरी पीढ़ी को मिला मौका, वाल्मीकि समाज और पीडीए समीकरण पर भाजपा का बड़ा दांव

अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक Surendra Diler को योगी सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया है। जानिए उनका राजनीतिक सफर, परिवार की तीसरी पीढ़ी, BJP की PDA रणनीति और पश्चिमी यूपी की राजनीति पर इसका असर।

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में खैर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया। जन भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। उनके मंत्री बनने के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सामाजिक और जातीय समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई।

भाजपा ने सुरेंद्र दिलेर को मंत्रिमंडल में शामिल कर पश्चिमी यूपी में दलित और पिछड़े वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया। राजनीतिक जानकार इसे समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले की काट के रूप में देख रहे हैं।

वाल्मीकि समाज में पकड़ मजबूत करने की कोशिश

सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समाज से आते हैं और भाजपा लंबे समय से इस वर्ग में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह देना भाजपा की सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा माना गया।

प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ समय से पीडीए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष दलित और पिछड़े वर्ग को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है। इसी को देखते हुए भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से युवा दलित चेहरे को आगे बढ़ाकर नया संदेश देने का प्रयास किया।

राजनीति विरासत में मिली, तीसरी पीढ़ी तक पहुंचा परिवार का प्रभाव

सुरेंद्र दिलेर का परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके दादा बाबा किशनलाल दिलेर छह बार विधायक और चार बार सांसद रहे थे। वहीं उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर भाजपा से हाथरस के सांसद और इगलास विधानसभा सीट से विधायक रह चुके थे।

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद राजवीर सिंह दिलेर का निधन हो गया था। इसके बाद भाजपा ने परिवार की तीसरी पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए सुरेंद्र दिलेर को खैर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया।

पहली बार विधायक बने और सीधे मंत्री पद तक पहुंचे

नवंबर 2024 में हुए खैर विधानसभा उपचुनाव में सुरेंद्र दिलेर ने समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी चारू कैन को 38,393 मतों से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। उनकी जीत को भाजपा की सामाजिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देखा गया।

विधायक बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें योगी सरकार में राज्यमंत्री का पद मिलना उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत माना जा रहा है।

अनूप प्रधान के बाद खैर सीट से मिला दूसरा मंत्री

जिस खैर विधानसभा सीट से सुरेंद्र दिलेर विधायक बने, उसी सीट से मौजूदा हाथरस सांसद अनूप प्रधान भी विधायक रहते हुए योगी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में खैर सीट का प्रतिनिधित्व लगातार सरकार में बना रहा।

कल्याण सिंह परिवार से जोड़ी जा रही तुलना

राजनीतिक गलियारों में सुरेंद्र दिलेर के परिवार की तुलना पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के परिवार से भी की जा रही है। जिस तरह कल्याण सिंह के बाद उनके पुत्र और फिर तीसरी पीढ़ी में संदीप सिंह राजनीति में सक्रिय हुए, उसी तरह दिलेर परिवार में भी तीन पीढ़ियां सक्रिय राजनीति में पहुंच चुकी हैं।

पहली पीढ़ी में बाबा किशनलाल दिलेर सांसद और विधायक रहे, दूसरी पीढ़ी में राजवीर सिंह दिलेर सांसद-विधायक बने और अब तीसरी पीढ़ी में सुरेंद्र दिलेर विधायक से मंत्री बने हैं।

पश्चिमी यूपी में भाजपा को मिलेगा राजनीतिक फायदा

भाजपा संगठन के स्थानीय नेताओं का मानना है कि सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाए जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी। साथ ही अलीगढ़ और आसपास के जिलों में भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष फोकस कर रही है।

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